इन दिनों मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा बाल विवाह के खिलाफ छेड़े गए अपने अभियान के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस अभियान के लिए कुछ लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं तो राज्य सरकार की ओर से शुरू किए गए इस अभियान पर सवाल उठाने वालों की भी कमी नहीं है। सभी चाहते हैं कि बाल विवाह पर रोक लगे और इस समस्या को जड़-मूल से समाप्त किया जाए, परंतु कई सालों पहले बाल विवाह कर चुके लोगों की गिरफ्तारी और उसके बाद परेशानी में कई लोगों की मौत ने अभियान के तौर- तरीके पर कई तरह के सवाल उठाए हैं।
इस तौर-तरीके पर सवाल सिर्फ आम लोग नहीं उठा रहे, बल्कि गौहाटी हाई कोर्ट ने भी इसको लेकर चलाए गए पुलिसिया अभियान पर सवाल खड़े किए हैं। बावजूद इसके सीएम का कहना है कि इस अभियान के शुरू होने से कई किशोरी असमय ही शादी होने के कुकृृत्य से बच गईं। सीएम का कहना है कि कुछ लोग भले ही इस अभियान को लेकर मेरी आलोचना कर रहे हैं, परंतु इस बुराई पर अंकुश लगाना जरूरी है, जिससे बड़ी संख्या में बेटियां बाल विवाह के अभिशाप से बच जाएंगी। जानकार बताते हैं कि कम उम्र में बच्चों की शादी कर देने से उनके स्वास्थ्य और मानसिक विकास के साथ-साथ खुशहाल जीवन पर असर पड़ता है। कम उम्र में शादी करने से पूरे समाज में पिछड़ापन आ जाता है। इसलिए हमारे देश के कानून में लड़के और लड़की की शादी के लिए एक निश्चित उम्र तय की गई है। इस उम्र से कम उम्र में शादी को बाल विवाह कहा जाता है। हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से तय किया गया है कि यदि लड़के- लड़की की उम्र 21 साल से कम है तो उसे बाल विवाह माना जाएगा।
इससे पहले तक लड़की की शादी की उम्र 18 और लड़के की 21 मानी जाती थी इससे कम उम्र में शादी करने की हमारे कानून में इस तरह की शादी की पूरी तरह से मनाही है। इस तरह के विवाह के कई कानूनी परिणाम हो सकते हैं। यदि 21 वर्ष से अधिक आयु का कोई लड़का 21 वर्ष से कम आयु की लड़की से विवाह करता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, जो एक लाख रुपए तक हो सकता है या दोनों से दंडित किया जाएगा। जिसके विवाहित जोड़े से कोई बच्चा है, वह अदालत से शादी को रद्द करवा सकता है। शादी के बाद कभी भी कोर्ट में अर्जी दी जा सकती है और दो साल के बच्चे होने के बाद भी, जो कोई भी पंडित, मौलवी, माता-पिता, रिश्तेदारों, दोस्तों आदि जैसे बाल विवाह करवाता है तो उसे दो साल तक के कठोर कारावास या एक लाख रुपए के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
जिस व्यक्ति की देखभाल में बच्चा है, अगर वह बच्चे की शादी करवाता है, चाहे वह माता-पिता, अभिभावक या कोई अन्य व्यक्ति हो, तो उसे किसी भी अवधि के कारावास से दो साल तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माने से दंडित किया जाएगा। एक लाख रुपए तक या दोनों के साथ बढ़ाया जा सकता है। आमतौर माना भी जाता है कि जो कोई भी किसी भी तरह से बाल विवाह को बढ़ावा देता है, या जानबूझकर इसे लापरवाही से नहीं रोकता है, जो बाल विवाह में संलग्न है या बाल विवाह की रस्मों में संलग्न है, उसे किसी भी अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे दो साल तक की सजा दी ज सकती है। भारतीय संस्कृृति में सोलह संस्कारों में विवाह संस्कार का विशेष महत्व है ।
वैदिक काल में यह संस्कार पवित्र भावनाओं का परिचायक था ,परन्तु परवर्ती काल में इसमें अनेक बुराइयां एवं कुप्रथाएं समाविष्ट हो गईं। इन्हीं विकृृतियों के फलस्वरूप हमारे देश में अनमेल विवाह तथा बाल विवाह का प्रचलन हुआ, जो कि हमारे सामाजिक सांस्कृृतिक जीवन के लिए घोर अभिशाप हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि बाल विवाह को हर हाल में रोका जाना चाहिए और जो भी इसे अंजाम दे रहा है, उसे कानून सम्मत तरीके से दंडित किया जाना चाहिए, परंतु हालिया अभियान में काफी पहले हुई शादी के कारण लोगों की गिरफ्तारी से कई घर-परिवार तबाह हो गए और कुछ लोगों की मौत तक हो गई, जो ठीक नहीं है, परंतु इस अभियान की मंशा सही है, उस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है।