नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने बुधवार को कहा कि पिछले साल जयपुर में पार्टी विधायक दल (सीलपी) की बैठक में भाग नहीं लेकर तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश की ‘अहवेलना करने वाले’ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई में ‘अत्यधिक विलंब’ हो रहा है तथा अगर राज्य में हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा बदलनी है तो कांग्रेस से जुड़े मामलों पर जल्द फैसला करना होगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले तीन नेताओं को चार महीने पहले दिए गए कारण बताओ नोटिस का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस नेतृत्व ही इसका सही जवाब दे सकते हैं कि मामले में निर्णय लेने में ‘अप्रत्याशित विलंब’ क्यों हो रहा है।

पायलट ने दिए साक्षात्कार में कहा कि विधायक दल की बैठक 25 सितंबर को मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई थी। यह बैठक नहीं हो सकी। बैठक में जो भी होता वो अलग मुद्दा था, लेकिन बैठक ही नहीं होने दी गई। उन्होंने कहा कि जो लोग बैठक नहीं होने देने और समानांतर बैठक बुलाने के लिए जिम्मेदार थे उन्हें  ‘प्रथम दृष्टया अनुशासनहीनता’ के लिए नोटिस दिए गए थे।