दुनिया में भारत का कद लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत की कूटनीति का डंका बज रहा है, जिसकी तारीफ दुश्मन देश के लोग भी कर रहे हैं। भारत की कूटनीति का ही कमाल है कि अमरीका और रूस दो जानी दुश्मन सुपर पावर के साथ भारत के अच्छे संबंध हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल अमरीका की यात्रा पर गए थे। उस यात्रा के दौरान उन्होंने अमरीकी विदेश मंत्री तथा अपने समकक्ष के साथ द्विपक्षीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। खासकर सामरिक सहयोग के मुद्दे पर दोनों देश मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं। मेक इन इंडिया के तहत अमरीका भारत में रक्षा के क्षेत्र में काम करने एवं उच्च तकनीक हस्तांरित करने पर भी सहमत हुआ है।
जासूसी गुब्बारे के मुद्दे पर अमरीका और चीन के बीच भारी तनाव है। दोनों ही देश इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाये हुए हैं। व्यापक तनातनी के बीच अमरीका इस मुद्दे पर भारत का साथ चाहता है। अमरीकी यात्रा के बाद डोभाल रूस की यात्रा पर भी गए हैं। अफगानिस्तान बहुपक्षीय सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने मास्को में कहा कि काबुल में समावेशी और प्रतिनिधि व्यवस्था की जरूरत है जो अफगान समाज के व्यापक हित में है। भारत सरकार अफगान लोगों की भलाई एवं मानवीय जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती रहेगी। भारत सरकार ने अपने बजट में अफगानिस्तान में चल रहे विभिन्न परियोजनाओं के लिए 200 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान रखा है। भारत के इस कदम से अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार गदगद है।
अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले लश्कर-ए-तैयबा, जैश -ए-मोहम्मद, हरकत-उल-मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठन अफगानिस्तान की सीमा की ओर सक्रिय हो गए हैं। ऐसी स्थिति में भारत को तालिबान से सहायता की जरूरत है। भारत से मिल रहे मदद के बाद तालिबान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह अपनी धरती से भारत विरोधी गतिविधियों को चलने नहीं देगा। यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पाकिस्तान तालिबान को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहता है। भारत की कूटनीति का नतीजा यह है कि आज पाकिस्तान और तालिबान एक-दूसरे के खून के प्यासे बने हुए हैं।
भारत ने तुर्की के भूकंप पीड़ितों को मानवीय सहायता भेजकर तुर्की को पाकिस्तान से दूर कर अपनी मुरीद बना लिया है। रूस के साथ भारत का घनिष्ठ संबंध जगजाहिर है। अंतर्राष्ट्रीय मामले के समाधान के क्षेत्र में भारत की पूछ होने लगी है। संयुक्तराष्ट्र संघ जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की बात सुनी जाने लगी है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र एवं अफ्रीकी देशों में भी भारत तेजी से अपने प्रभाव का विस्तार कर रहा है।