ताइवान को लेकर अमरीका और चीन के बीच पहले से ही तनाव चल रहा है। चीन ताइवान को अपना प्रांत बताकर कब्जा करने की कोशिश में है तो दूसरी तरफ अमरीका ताइवान की संप्रभुता की रक्षा के लिए उसके साथ खड़ा है। अमरीका ताइवान की सामरिक ताकत बढ़ाने के लिए हर तरह की सहायता दे रहा है। इसके अलावा अमरीका ताइवान को पूरा कूटनीतिक समर्थन भी दे रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की दादागिरी को रोकने के लिए अमरीका ताइवान के साथ-साथ जापान एवं दक्षिण कोरिया में भी अपनी सामरिक उपस्थिति बढ़ा चुका है। दक्षिण एवं पूर्वी चीन सागर में अमरीकी युद्ध पोत अलर्ट मोड में है। उस क्षेत्र में अमरीका अपने सहयोगी देशों के साथ लगातार युद्धाभ्यास कर रहा है। चीन भी ताइवान को डराने के लिए हर तरह के हथकंडे का इस्तेमाल कर रहा है। ताइवान भी अपनी आजादी की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। भारत भी चीन के पड़ोसी देशों को कूटनीतिक, सामरिक एवं नैतिक समर्थन दे रहा है।
गुब्बारा कांड ने अमरीका और चीन के बीच तनाव और बढ़ा दिया है। मालूम हो कि पिछले एक सप्ताह से चीन का जासूसी गुब्बारा अमरीका, कनाडा एवं लैटिन अमरीका के ऊपर उड़ रहा था। जब यह गुब्बारा कनाडा होते हुए अमरीका के मोंटाना मिसाइल फील्ड के ऊपर उड़ रहा था उस वक्त अमरीका में हड़कंप मच गया। मालूम हो कि मोंटाना अमरीका का न्यूक्लीयर फील्ड है, जहां अमरीका अपने गुप्त एवं संवेदनशील हथियारों का परीक्षण करता है उस क्षेत्र में अमरीका के कई ऐसे बेस हैं, जहां अमरीका अपने हथियारों को छिपा कर रखा है। अमरीका को संदेह था कि यह जासूसी गुब्बारा है जिसका इस्तेमाल चीन अमरीका की खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए कर रहा है। चीन का दावा है कि यह गुब्बारा मौसम की जानकारी इकट्ठा कर रहा था, किंतु अमरीका को चीन के दावे पर विश्वास नहीं है। यही कारण है कि अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तुरंत इस गुब्बारे को मार गिराने का आदेश अमरीकी रक्षा विभाग पेंटागन को दिया।
इसको मारने के लिए अमरीकी लड़ाकू विमान एफ-22 का इस्तेमाल किया गया। इसके लिए विशेष मिसाइल का इस्तेमाल किया गया, क्योंकि यह गुब्बारा पृथ्वी से 60 हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर उड़ रहा था। उस पर तब हमला किया गया जब यह गुब्बारा अटलांटिक महासागर के ऊपर उड़ रहा था। अब अमरीकी अधिकारी गुब्बारे का मलबा इकट्ठा कर जांच में जुट गए हैं कि वह गुब्बारा अमरीका की क्या-क्या जानकारी इकट्ठा कर चुका था। इसको लेकर अमरीका और चीन के बीच तनाव चरम पर है। इसको देखते हुए अमरीकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन का चीन दौरा रद्द कर दिया गया है। दोनों देशों की सेनाएं चौकन्नी हैं। चीन का कहना है कि वह सिविलियन बैलून था, लेकिन चीन की बात पर कोई विश्वास नहीं करता है। भारत द्वारा अग्नि-5 मिसाइल के परीक्षण के वक्त भी चीन ने हिंद महासागर में अपना जासूसी जहाज भेज दिया था। चीन इसके माध्यम से भारत के मिसाइल कार्यक्रम के बारे में जानकारी इकट्ठा करना चाहता था।
इसको लेकर भारत ने अपने मिसाइल टेस्ट कार्यक्रम को और आगे बढ़ा दिया था। चीन दूसरे देशों की सामरिक तैयारी से संबंधित खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए अपने जासूसी जहाजों, उपग्रहों का इस्तेमाल करता रहता है। चीनी जासूसी जहाज को लेकर भारत और चीन के बीच भी तनातनी बढ़ गई थी। अमरीका के साथ भी वर्तमान घटना ने एक बार फिर से चीन को विवाद में ला दिया है। चीन इसको लेकर जबाबी हमले के अधिकार की बात करता है, किंतु अमरीका भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। भारत को पूरे मामले में सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि चीन भारत के खिलाफ लगातार षड्यंत्र रच रहा है। दोनों महाशक्तियों के तनाव का असर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में निश्चित रूप से पड़ेगा, क्योंकि अमरीका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर पहले ही चीन को घेरने की कोशिश में लगा हुआ है।