लखनऊ : युवाओं के रोजगार व सेवायोजन के लिए नियोजित प्रयास कर रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट से पूर्व एक अभिनव पहल की है। सरकार की रोजगारोन्मुखी योजनाओं, नीतियों से युवाओं को परिचित कराने के लिए मुख्यमंत्री ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के 12, भारतीय पुलिस सेवा के 06 और भारतीय वन सेवा के 06 अधिकारियों (सभी सेवानिवृत्त) तथा 24 शिक्षाविदों सहित की 48 सदस्यीय टीम गठित की है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में बीते साढ़े पांच-पौने छह वर्ष में देश-दुनिया के सामने उत्तर प्रदेश ने अपनी नई पहचान बनाई है। प्रदेश के प्रति लोगों की धारणा बदली है। आप सभी इस बड़े बदलाव के साक्षी रहे हैं, सहयात्री रहे हैं।
उत्तर प्रदेश अपार संभावनाओं का प्रदेश है। देश और प्रदेश के समग्र विकास में हमें इन संभावनाओं को जमीन पर उतारना होगा। आप सभी के पास सार्वजनिक जीवन का लंबा अनुभव है। महत्वपूर्ण पदों पर दायित्व निर्वहन किया है। आपके इन अनुभवों से हमारे युवा लाभान्वित हों, इसके लिए आप सभी का सहयोग अपेक्षित है।
वर्ष 2017 में जब हमने प्रदेश की जिम्मेदारी संभाली थी, तब प्रदेश की अर्थव्यवस्था की स्थिति दयनीय थी। हमने सभी पहलुओं का अध्ययन किया और फिर नीतिगत सुधार और व्यवस्था के सरलीकरण के लिए मिशन मोड में काम किया। कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर करने के प्रयास हुए। और फिर अगले ही वर्ष जब हमने इंवेस्टर्स समिट आयोजित किया तोड़ 4.68 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव हमें मिले। इसके उपरांत तीन ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से हम लगभग 4 लाख करोड़ तक के प्रस्तावों को जमीन पर उतार चुके हैं। वर्ष 2017 में जब हमने किसानों की ऋण माफी की योजना को क्रियान्वित करने के लिए बैंकर्स को फोन किया तो हमें हतोत्साहित करने वाले नतीजे मिले। किसी ने हमारा फोन रिसीव नहीं किया।
और अभी बीते दिनों जब मुंबई में बैंकर्स और वित्तीय संस्थाओं के सीईओ, एमडी आदि से भेंट हुई तो लोग स्वतः स्फूर्त भाव से प्रदेश के विकास में सहायक बनने की उत्सुकता जता रहे थे। उत्तर प्रदेश में विकास में असमानता एक बड़ी समस्या रही है। मध्य उत्तर प्रदेश और एनसीआर की तुलना में पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड का बहुत कम विकास हुआ था।