हंगाई, भ्रष्टाचारी और बेरोजगारी के माहौल में इंसान तो कब का रोना भूल चुका है। इंसान रोते-रोते इतना रोने लग गया है कि अब अच्छे-खासे भूत भी रोने लगे हैं। भूतों के रोने की आवाज बहुत ही अटपटी सी होती है। झटझटी सी होती है। भूत इंसान की तुलना में जोर-जोर से रोता है। भूत इसलिए रोता है क्योंकि इंसान के मरने के बाद भी उसकी आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पाती है और ना ही कोई उसकी इच्छाओं को पूरी करता है। आजकल भूतों के रोने का कार्यक्रम बहुत तेज गति से बढ़ा है। जितनी भी सरकारें आती है, वे जनता की इच्छाओं को पूरी करने का झुनझुना बजाती है। संकल्प पत्र सजाती है। पार्टी का घोषणा पत्र हवा में लहराती है। वोट खींचने के लिए यात्राओं के मेले रचाती है। वोट लेने के बाद व्यक्तियों की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो पाती है। जितने भी पार्टी बाज नेता खड़े हैं। अपने-अपने चुनावी समर में अकड़े हैं। जनता को बढ़िया सपने दिखाने में इनके खेल बड़े हैं। ये सब अच्छे-खासे इंसान को भूत बनाने में सिद्धहस्त हैं। इंसान कभी भी किसी भी समय रोने लगते हैं। अपनी आंखों के दीए खोने लगते हैं।
भूत लोग बहुत बड़े टाइम के पक्के होते हैं। जैसे ही रात के 12 बजते, ये नियमानुसार रोने लगते हैं। भूत लोग भूत आयोग के द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हैं। भूतों के टाइम मैनेजमेंट से ही देश दुनिया के बड़े-बड़े नेता, व्यापारी और अफसर अपना मैनेजमेंट करते हैं। समय के पक्के और कर्तव्यनिष्ठ भूत दिन के उजाले में किसी भी प्रकार का अनिष्ट नहीं करते हैं, लेकिन नेताओं के लिए यह बात लागू नहीं होती है। वे चौबीसों घंटे अपनी कुर्सी बचाने के लिए किसी का भी अनिष्ट करने के लिए तत्पर रहते हैं। मार्केट में भूत भगाने की दुकानों का भी बड़ा जलवा है। इन दुकानों की आड़ में ही अघोरियों का बड़ा बलवा है। देश की तमाम राजधानियों के तहखानों-कैंटिनों आदि में भ्रष्टाचारी, अपचारी तांत्रिकों का काला धंधा खुलेआम चल रहा है। अगरबत्तियां और चिराग जल रहे हैं। सत्ता के दलाल तांत्रिक दरवाजा पकड़कर अपने ढंग की माला फेर रहे हैं। आम आदमी को खड़े-खड़े भूतों का डर दिखाकर अपने साथ-साथ अपने नेता का भी उल्लू-सीधा कर रहे हैं। शासन सचिवालय के कोने-कोने में इस तरह के दलाल टाइप तांत्रिक मिल जाएंगे, जो फाइलों में लगी चुड़ैलों को भगाने के लिए, नोट शीट पर अटके पड़े कामों के भूत मारने के लिए तंत्र-मंत्र करते हैं। वातावरण में भ्रष्टाचार के गुलाबी फूलों की पंखुड़ियां उड़ रही है। परेशान लोगों को भूत भगाने का सब्ज बाग दिखा रहे हैं। बहुत पुराने समय में जीर्ण इमारतें, शाही मकान, किले, बंगले, घाट आदि भूत पीड़ित स्थान हुआ करते थे। समय बदला और अब नेताओं निवास स्थान, शासन सचिवालय, सरकारी कार्यालय आदि भूत पीड़ित स्थल बन गए हैं।
रामविलास जांगिड़