नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बदलते परिवेश में पुलिस को सक्षम, सतर्क एवं चुस्त होना जरूरी है। आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेवारी मुख्य रूप से पुलिस की होती है। लेकिन विशेष परिस्थिति में राज्य सरकारें केंद्रीय सुरक्षा बलों की सहायता लेती हैं। आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध एवं मानव तस्करी की बढ़ती चुनौती को देखते हुए पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच तालमेल एवं सहयोग की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यों के पुलिस महानिदेशकों एवं महानिरीक्षकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय एजेंसियों एवं राज्य पुलिस के बीच सहयोग पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पुलिस को आधुनिक प्रौद्योगिकी से लैस करने के साथ-साथ पैदल गश्त की भी जरूरत होगी। महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराध को देखते हुए विभिन्न सरकारों द्वारा कड़े फैसले लिये गए हैं, किंतु अभी तक उनका संतोषजनक असर देखने को नहीं मिला है। आरोपी तो पकड़े जा रहे हैं, किंतु घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। आजकल अपराधियों, उपद्रवियों एवं आतंकियों का नेटवर्क सीमा पार तथा विभिन्न राज्यों से जुड़ा हुआ है। ऐसी स्थिति में बिना समन्वय के उन पर काबू पाना संभव नहीं है। सिद्धांत के तौर पर समन्वय के लिए सहमति तो बन जाती है, किंतु उसे वास्तविक धरातल पर उतारा नहीं जा सका है। बहुत से आतंकी संगठनों की जड़ें देश के बाहर जुड़ी होती है। उनके द्वारा हथियारों एवं मादक पदार्थों की तस्करी की जाती है। इन लोगों के बारे में स्थानीय पुलिस को ठोस जानकारी रहती है, किंतु विभिन्न कारणों से पुलिस खुफिया जानकारी केंद्रीय एजेंसियों को नहीं देती है। सफलता के लिए राज्य पुलिस को जनता का विश्वास जीतना होगा। पहले भी पुलिस विभाग में सुधार के लिए कई सिफारिशें की गई थीं, किंतु राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में इस पर अमल नहीं हो सका। कई मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण पुलिस आगे कदम नहीं उठा पाती है तथा मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। पुलिस अभी तक आम जनता में धौंस दिखाकर अपना काम करती रही है। इस कारण पुलिस और आम जनता के बीच आज भी दूरी बरकरार है। ऐसी स्थिति में आम जनता अपराधों के मामले में कोई ठोस जानकारी पुलिस को नहीं देती है, क्योंकि उनको खुद फंसने का डर रहता है। जब तक यह दूरी कम नहीं होगी तब तक पुलिस और जनता के बीच सहयोग नहीं बढ़ेगा। आज जरूरत इस बात की है कि संसाधनों एवं रणनीतिक दोनों ही स्तरों पर बदलाव किया जाए। इस पर आगे अमल करने की भी जरूरत पड़ेगी। महानिदेशकों एवं महानिरीक्षकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने भी पुलिस को उचित सलाह दी है। इस सम्मेलन में बाहरी चुनौतियों से भी पुलिस को रू-ब-रू कराया गया। पड़ोसी देश चीन भारत के पड़ोसी देशों में अपना प्रभाव तेजी से बढ़ाकर भारत को चुनौतियों से निपटने में उलझाये रखना चाहता है ताकि भारत के प्रभाव को कम किया जा सके। चीन भारत को अपनी शर्तों पर द्विपक्षीय मुद्दों के समाधान के लिए बाध्य करना चाहता है। ऐसी स्थिति में भारत को आंतरिक एवं बाहरी दोनों ही मोर्चों पर चौकस रहना होगा। सामरिक एवं कूटनीतिक पहल के साथ-साथ देश की आंतरिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।