शनि ग्रह न्यायप्रिय ग्रह है, शनि ग्रह का नवग्रहों में प्रमुख स्थान है। भगवान् सूर्य के सुपुत्र श्रीशनिदेव जी की महिमा अपरंपार है। शनिग्रह की पूजा शनिवार के दिन विशेष फलदाई रहती है, यदि शनिवार के दिन अमावस्या तिथि का संयोग मिल जाए तो पूजा अधिक फलदाई होती है। इस बार मौनी अमावस्या के दिन शनैश्चरी अमावस्या पड़ रही है जो कि अपने आप में खास लाभदाई बन गई है। प्रख्यात ज्योतिर्विद्  विमल जैन ने बताया कि इस बार अमावस्या तिथि संयोगवश शनिदेव के विशेष दिन शनिवार, 21 जनवरी  को पड़ रही है। माघ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शुक्रवार, 20 जनवरी को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 6 बजकर 18 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन शनिवार, 21 जनवरी को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 2 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। शनिवार, 21 जनवरी को संपूर्ण दिन अमावस्या तिथि होने से यह पर्व इसी दिन मनाया जाएगा।

मौनी अमावस्या पर मौन रहकर स्नान-दान करने से मनुष्य के कई जन्मों के पाप मिट जाते हैं। शनैश्चरी अमावस्या के दिन शनिग्रह की विधि-विधान से की गई पूजा सुख, समृद्धिकारक होती है, साथ ही शनिग्रहजनित दोष से मुक्ति भी मिलती है। शनि अमावस्या के दिन कालसर्पदोष का निवारण करना विशेष मंगलकारी रहता है। पितृदोष की शांति के लिए भी अमावस्या तिथि श्रेयस्कर मानी गई है। आज के दिन भगवान शिवजी, श्रीविष्णु जी तथा पीपल के वृक्ष की भी पूजा का विधान है। पीपल के वृक्ष को जल से सींचन करके 108 बार परिक्रमा करने पर खुशहाली मिलती है।

विमल जैन  ने बताया कि कर्क एवं वृश्चिक राशि पर शनिग्रह की अढ़ैया, जबकि मकर, कुंभ एवं मीन राशि पर शनिग्रह की साढ़ेसाती का प्रभाव है। शनैश्चरी अमावस्या कठिन व विषम प्रभाव दिखाने वाली होती है। जनमानस को विश्व में अनेकानेक अप्रत्याशित विषम घटनाओं से रूबरू होना पड़ता है। प्राकृतिक एवं दैविक आपदाओं के साथ मौसम में भी अजीबोगरीब परिवर्तन देखने को मिलता है।