अमेठी : अमेठी जिले के डीएम आईएएस राकेश कुमार मिश्र का साहित्यिक पहलू अपने आप में विशेष है। अंग्रेजी माध्यम से स्कूलिंग और कॉलेज में संस्कृत की पढ़ाई करने के बाद राकेश कुमार मिश्र हिंदी पर चार काव्य संग्रह लिख चुके हैं। उनकी 700 से अधिक कविताएं मन को छूने वाली है। उनकी काव्य व्यक्तित्व पर भी पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिसमें देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर्स के साथ ही विदेशी प्रोफेसर्स ने भी लेख लिखे हैं। 1993 बैच के पीसीएस और 2012 के आईएएस राकेश कुमार मिश्र का साहित्यिक अवदान काफी बड़ा है। प्रशासनिक सेवक होते हुए भी कविता की यात्रा में उनकी सेवा की झलक नहीं दिखती है। भाषाई विविधता से भरे जीवन मे हिन्दी उनके सपनों की भाषा है। उनका कहना है कि जिस भाषा में हम स्वप्न देखते हैं वही हमारी मातृ भाषा है। यह संघर्ष की भाषा है। भारत जैसे विविधताओं वाले देश में हिंदी पूरे देश को एकसूत्र में बांधती है। विभिन्न राज्यों में यह कामकाजी की भाषा है। कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग को लेकर वे बेहद आशावादी हैं। कहते हैं कि अपनी भाषा छोड़ देने से व्यक्ति नष्ट हो जाता है। उर्दू या अन्य भाषाओं की अधिकता के बाबत उनका साफ मत है कि हिन्दी का किसी भारतीय भाषा से विरोध नहीं है। इसका अंग्रेजी से भी विरोध नहीं है। अंग्रेजी बोलना अलग है, विद्वान होना अलग। कई जगहों पर बेहद कम पढ़े लिखे लोग धारा प्रवाह अंग्रेजी बोलते हैं। वे हिंदी का भविष्य बहुत उज्ज्वल देखते हैं। कहते हैं लगातार हिंदी विकसित हो रही। प्रशासनिक सेवाओं में अध्ययन सामग्रियां हिंदी में आ रही हैं। मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई में हिंदी में पाठ्यक्रम आने लगा है। यह उत्तरोत्तर बढ़ेगा।
आईएएस राकेश कुमार मिश्र ने अंग्रेजी मीडियम से की पढ़ाई, संस्कृत रहा विषय, हिंदी में लिखे चार काव्य