सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है। इस दौरान अगर आप बोझिल, सुस्त और थका हुआ महसूस कर रहे हैं तो घबराए नहीं। यह आम बात है। दरअसल, सर्दियों में अक्सर काम करने का उत्साह कम होने लगता है। रात में नींद नहीं आती और सुबह के वक्त देर तक सोने की इच्छा होती है। ऐसा सीजनल डिप्रेशन के कारण होता है। हाल ही में हुई एक रिसर्च में सामने आया कि अमरीका के 10 प्रतिशत लोग इससे प्रभावित हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ वर्मोंट के मनोवैज्ञानिक कैली रोहन ने बताया कि सर्दियों में दिन छोटे और ठंडे होने से सीजनल डिप्रेशन के लक्षण बढ़ जाते हैं। 

मेलाटोनिन हॉर्मोन है डिप्रेशन की वजह : सीजनल डिप्रेशन से अनिद्रा और थकान का चक्र शुरू हो जाता है, जो डिप्रेशन को और बढ़ाता है। एक अन्य रिसर्च के अनुसार शरीर में रात के समय मेलाटोनिन हॉर्मोन बनता है। इससे सोने में मदद मिलती है। सुबह के समय इस हॉर्मोन का स्तर कम होने लगता है। इससे नींद खुलती है। सर्दियों में कई लोगों में मेलाटोनिन देर से बनना शुरू होता है और सुबह देर तक बनता रहता है। इससे लोगों को सुबह उठने में कठिनाई होती है और वे थका हुआ महसूस करते हैं। देर से उठने से रात में नींद देर से आती है। इससे अनिद्रा और थकान का चक्र शुरू हो जाता है, जो डिप्रेशन को बढ़ाता है। यह ज्यादातर सर्दियों की शुरुआत में होता है और इसे सीजनल डिप्रेशन कहते हैं। यह मौसम बदलने के साथ अपना प्रभाव दिखाता है। हालांकि कई लोगों में गर्मियों के दौरान भी सीजनल डिप्रेशन के लक्षण आ जाते हैं। सीजनल डिप्रेशन के ज्यादातर पीड़ितों में अक्तूबर से नवंबर के बीच लक्षण दिखाई देने शुरू हो जाते हैं। इससे बचने के लिए सुबह उठते ही सूरज की रोशनी में टहलना जरूरी है। साइकिलिंग या खेलना फायदेमंद साबित होता है। हालांकि कुछ लोगों को व्यक्तिगत कारणों से भी ऐसा होता है।