पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामाबाद पहुंचने की जिद्द छोड़कर अचानक पाकिस्तानी संसद एवं प्रांतीय विधानसभाओं से अपनी पार्टी के सदस्यों के इस्तीफे की घोषणा कर नया सियासी दांव चल दिया है। पीटीआई के मार्च को रोक देने से शहबाज शरीफ सरकार व सेना से होने वाला टकराव फिलहाल टल गया है। अगर इमरान का मार्च आगे बढ़ता तो सेना को मैदान में उतरने के लिए बाध्य होना पड़ता। लेकिन इमरान की पहल से पाकिस्तान की सरकार पर जल्द चुनाव की घोषणा का दबाव बढ़ गया है। पाकिस्तानी संसद के निचले सदन में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के 149 सदस्य हैं। जबकि इसकी कुल क्षमता 342 है। ऐसी स्थिति में सरकार गिरने की संभावना कम है। लेकिन इसका असर प्रांतीय सरकारों पर पड़ सकता है। पंजाब की प्रांतीय सरकार पीटीआई के समर्थन पर निर्भर है। अगर पीटीआई ने समर्थन वापस लिया तो परवेज की सरकार तुरंत गिर जाएगी। इसी तरह इमरान खान के गृह राज्य की सरकार भी गिर जाएगी। दो प्रांतीय सरकारों के गिरने से चुनाव कराने का दबाव शहबाज सरकार पर निश्चित रूप से बढ़ जाएगा। मार्च स्थगित होने के बाद स्थिति पर विचार करने के लिए एक बैठक बुलाई गई है जिसमें इमरान की घोषणा पर विस्तार से चर्चा होगी। इसको लेकर पाकिस्तान में सियासत भी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ गठबंधन ने इमरान की घोषणा को जहां उनकी विफलता करार दिया है वहीं पीटीआई ने इसे अपनी कामयाबी के रूप में दिखाया है। इमरान खान के मार्च के कारण सरकार और सेना का सिरदर्द बढ़ता जा रहा था। पाकिस्तान पहले से ही अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। पाक अधिकृृत कश्मीर (पीओके) एवं बलूचिस्तान में सरकार के खिलाफ आक्रोश है। जनता सड़कों पर उतर चुकी है। पाकिस्तान के वर्तमान सेनाध्यक्ष कमर बाजवा इस महीने रिटायर हो रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल असिम मुनीर पाकिस्तान के अगले सेनाध्यक्ष होंगे। पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएआई के पूर्व प्रमुख मुनीर इमरान खान के साथ पहले से ही टकराव रहा है। इमरान खान ने अपने शासन में मुनीर को आईएआई के प्रमुख के पद से हटा दिया था। अभी पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसी स्थिति है। ऐसी स्थिति में नए सेना प्रमुख के सामने स्थिति को संभालने की बड़ी चुनौती है। अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार के तरफ से भी काफी चुनौती मिल रही है। तालिबानी अब पाकिस्तान के लिए ही राहू-केतु बन रहे हैं। पाकिस्तान के नए सेनाध्यक्ष की नीति भारत विरोधी रही है। पुलवामा हमले का मास्टर माइंड मुनीर को ही माना जाता है। वैसे भी पाकिस्तान की सेना हमेशा भारत के खिलाफ रही है, चाहे सेनाध्यक्ष कोई भी हो। पाकिस्तान की आंतरिक सि््थति का असर भारत पर पड़ना स्वाभाविक है। अपनी आंतरिक स्थिति से ध्यान हटाने के लिए वहां की सरकार तथा सेना तनाव की स्थिति पैदा कर देती है। पाकिस्तानी सत्ता की वास्तविक चाबी सेना के हाथ में होती है। वहां के बजट का बड़ा हिस्सा सेना के हिस्से में जाता है। यही कारण है कि पाकिस्तानी लोकतंत्र के मुखौटे के पीछे सेना का शासन चलता है। पाकिस्तान में चल रही राजनीतिक अस्थिरता के प्रति भारत को सावधान रहना पड़ेगा।
इमरान का नया पैंतरा
