असम के पश्चिमी कार्बी आंग्लांग तथा मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स सीमा पर मुकरोह में पिछले मंगलवार को असम पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में मेघालय के पांच नागरिकों तथा असम के एक वन कर्मी की मौत हो गई है। इस घटना के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव बना हुआ है। असम से मेघालय में जाने वाले वाहनों पर तत्काल रोक लगा दी गई है क्योंकि मेघालय में असम के वाहनों पर हमले हो रहे हैं। मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने इस घटना को लेकर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा के समक्ष यह मुद्दा उठाया है। मुख्यमंत्री शर्मा ने यह स्वीकार किया है कि असम पुलिस को इस मामले में धैर्य से काम लेना चाहिए था। असम सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पश्चिम कार्बी आग्लांग जिले के पुलिस अधीक्षक इमदाद अली को स्थानांतरित कर दिया है तथा वहां के स्थानीय थाने के प्रभारी एवं एक वनकर्मी को निलंबित कर दिया गया है। असम के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को नई दिल्ली में कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें इस घटना की जांच सीबीआई से कराने को मंजूरी दी गई। असम सरकार गौहाटी हाईकोर्ट के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश रूमी फूकन से इस घटना की न्यायिक जांच करवाने का भी निर्णय लिया है। यह समिति 60 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इंद्रनिल बरुवा को तत्काल पश्चिमी कार्बी आंग्लांग का पुलिस अधीक्षक बनाकर कार्यभार लेने को कहा गया है। इस घटना को लेकर मेघालय के लोगों में काफी आक्रोश है। यह कारण है कि मेघालय के मुख्यमंत्री संगमा के नेतृत्व में राज्य का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित साह से मिलकर इस घटना की जानकारी दी है तथा केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने का अनुरोध किया है। लेकिन असम सरकार ने पहले ही सीबीआई से जांच कराने की अनुसंशा कर मेघालय की मांग पूरी कर दी है। असम का पड़ोसी राज्यों के साथ सीमा विवाद कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर इसको लेकर संघर्ष भी होता रहा है। लेकिन हिमंत विश्वशर्मा सरकार सीमा विवाद के स्थाई समाधान के लिए मेघालय, मिजोरम एवं अरुणाचल प्रदेश के साथ वार्ता शुरू की है। मेघालय के साथ विवादित 12 जगहों में से छह जगहों की समस्याओं को हल कर लिया गया है। बाकी के छह विवादित जगहों की समस्या की समाधान के लिए मंत्री स्तर पर बातचीत चल रही है। स्थानीय प्रशासन को भी इस काम में लगाया गया है। मुकरोह की घटना को लेकर चल रहे सीमा समस्या के समाधान की प्रक्रिया को धक्का लग सकता है। हालांकि दोनों राज्य सरकारें इस मुद्दे को लेकर सकारात्मक सोच के साथ आग बढ़ रही हैं। वर्ष 2010 में भी इस तरह की घटना हुई थी जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2021 में मिजोरम सीमा पर हुई हिंसक झड़प में असम के छह जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। यह अच्छी बात है कि असम सरकार अपने पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर सीमावर्ती क्षेत्र के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने का विचार कर रही है जिसपर पुलिस कर्मियों तथा वनकर्मियों को अमल करना होगा। इस एसओपी में यह स्पष्ट उल्लेख रहेगा कि इन परिस्थितियों में किस तरह का कदम उठाया जा सकता है। मेघालय का वर्तमान विवाद अवैध रूप से पेड़ काटने को लेकर है। मेघालय से आए कुछ लोग असम की सीमा में घुसकर पेड़ काटकर ट्रक पर लाद ले जा रहे थे। उसी दौरान वन विभाग द्वारा रोकने पर हिंसा की घटनाएं हुईं। अगर असम पुलिस हिंसक भीड़ को रोकने के लिए रबड़ की गोली की भी चला सकती थी। इस घटना से सीख लेकर दोनों राज्यों को सतर्क होने की जरूरत है। भविष्य में इस तरह की घटनाएं न होकर इसके लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। हिंसा से किसी समस्या का हल नहीं हो सकता। वाहनों पर अनावश्यक हमला करना या आगजनी उचित नहीं है। सभी पक्षों को ठंडे दिमाग से काम लेना होगा ताकि मामला और आगे नहीं बढ़े।
असम-मेघालय सीमा पर तनाव
