गुजरात विधानसभा के लिए मतदान एक और पांच दिसंबर को होने जा रहा है। आठ दिसंबर को मतगणना होगी तथा उसी दिन चुनाव परिणाम मिल जाएंगे। विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही गुजरात में सियासी सरगर्मी बढ़ती जा रही है। सभी राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार गुजरात के दौरे पर हैं। अब तक वे तीन बार गुजरात में जनसभाओं को संबोधित कर चुके हैं। प्रधानमंत्री के लिए गुजरात विधानसभा का चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है क्योंकि वह उनका गृह राज्य है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह खुद गुजरात चुनाव की बागडोर संभाले हुए हैं। देश-विदेश की नजर गुजरात चुनाव पर टिकी हुई है। पिछले 27 वर्ष से गुजरात की गद्दी पर भाजपा का कब्जा है। भाजपा फिर गुजरात की सत्ता तक पहुंचने के लिए धुआंधार चुनाव प्रचार कर रही है। प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री के अलावे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित भाजपा के कई बड़े नेता प्रचार अभियान में कूद चुके हैं। हिंदुत्व के मुद्दे को चुनावी सभा में प्रमुखता से उठाया जा रहा है। इस बार के चुनाव में कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी भी जोरशोर से लगी हुई है। गुजरात में पहले से भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला होता आया है। किंतु इस बार आम आदमी पार्टी के चुनाव में कूद जाने के कारण मुकाबला त्रिकोणीय हो चला है। दिल्ली के बाद पंजाब में भारी जीत दर्ज करने के बाद आम आदमी पार्टी की नजर गुजरात पर लगी हुई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी लगातार गुजरात के दौरे पर हैं तथा मतदाताओं को दिल्ली मॉडल की याद दिला रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी अब प्रचार अभियान के लिए गुजरात पहुंच चुके हैं। भाजपा कांग्रेस और आप से मिल रही चुनौती से अनभिज्ञ नहीं है। यही कारण है कि भाजपा हाईकमान ने चुनाव से पहले गुजरात के पूरे मंत्रिमंडल को बदल दिया। पटेल एवं दूसरे पिछड़े समाज एवं आदिवासी समाज को अपने पाले में रखने के लिए भाजपा ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाने के पीछे भाजपा की यही मंशा है। पिछड़े वर्ग को हाथ में रखने के लिए भाजपा ने कांग्रेस से आए हार्दिक पटेल एवं अल्पेश ठाकोर को पार्टी का टिकट देकर पटेल एवं दूसरे पिछड़े वर्गों को सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया है। मालूम हो कि गुजरात के शहरी क्षेत्रों के लोग रोजगार की जगह व्यापर को ही तरजीह देते हैं। शहरी क्षेत्रों में भाजपा की स्थिति काफी मजबूत है। दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं किसानों की समस्याएं चुनावी मुद्दा बना हुआ है। यही कारण है कि गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिल रही है। असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाले एआईएमआईएम के मैदान में उतरने से कांग्रेस तथा आप का मुस्लिम वोट बंटने का खतरा पैदा हो गया है। इसका सीधा लाभ भाजपा को मिलेगा। भाजपा इस चुनाव में हिंदुत्व कार्ड खेलने से परहेज नहीं कर रही है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा अपनी चुनावी सभाओं में समान नागरिक कानून तथा हिंदुत्व से जुड़े दूसरे मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं। आम आदमी पार्टी दिल्ली की तरह रियायतों की बरसात कर रही है। कुल मिलाकर गुजरात विधानसभा का चुनाव काफी दिलचस्प होता जा रहा है।
गुजरात विधानसभा चुनाव
