भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रत्येक माह के तिथि-पर्व कीविशेष महिमा है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि अमावस्या तिथि के दिन कुल देवी-देवता एवं शिवपूजा भी कल्याणकारी होती है। विमल जैन  ने बताया कि मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि बुधवार, 23 नवंबर को प्रातः 6 बजकर 54 मिनट पर लगेगी जो कि उसी दिन बुधवार, 23 नवंबर को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 4 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार आज अमावस्या तिथि संपूर्ण दिन रहेगी। इस तिथि पर स्नान-दान-व्रत करने का विशेष महत्त्व है। जातक की जन्मकुंडली में पितृदोष या कालसर्पदोष हो तो उसके निमित्त भी आज के दिन विशेष अनुष्ठान करवाकर लाभान्वित होना चाहिए। अमावस्या तिथि पर कैसे करें पूजा : अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार धार्मिक विधि-विधान से अमावस्या तिथि के पर्व-अनुष्ठान सम्पादित होंगे। पीपल वृक्ष की पूजा-अर्चना से सुख-समृद्धि, खुशहाली मिलती है।  इस दिन पीपल के वृक्ष व भगवान् विष्णु जी की पूजा-अर्चना के साथ पीपल वृक्ष की परिक्रमा करने पर आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पीपल वृक्ष की विशेष महिमा : पीपल वृक्ष में समस्त देवताओं का वास माना गया है। अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष को जल से सिंचन करके विधि-विधान पूर्वक पूजा के पश्चात् 108 बार परिक्रमा करने पर सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन व्रत उपवास रखकर इष्ट-देवी देवता एवं आराध्य देवी देवता की पूजा अर्चना अवश्य करनी चाहिए। ब्राह्मण को घर पर निमंत्रित करके उन्हें भोजन करवाना चाहिए। तत्पश्चात् सफेद रंग की वस्तुओं का दान जैसे—चावल, दूध, मिश्री, चीनी, खोवे से बने सफेद मिष्ठान्न, सफेद वस्त्र, चांदी एवं अन्य सफेद रंग की वस्तुएं दक्षिणा के साथ देकर, उनका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए। किसी कारणवश यदि ब्राह्मण को भोजन न करवा सकें तो इस स्थिति में उन्हें भोजन सामग्री (सिद्धा) के साथ नकद द्रव्य देकर पुण्यलाभ प्राप्त करना चाहिए। पीपल के वृक्ष की पूजा का आज विशेष महत्व है। पीपल वृक्ष पूजा के मंत्र—ॐ मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्ए विष्णुरूपिणे अग्रतो शिवरूपाय पीपलाय नमो नमः। आज के दिन व्रतकर्ता को अपनी दिनचर्या नियमित व संयमित रखते हुए यथासंभव गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों की सेवा व सहायता तथा परोपकार के कृत्य अवश्य करने चाहिए। अमावस्या तिथि पर स्नान-दान-पुण्य करना सदैव लाभकारी तो रहता ही है, यदि हम अपनी राशि के अनुसार वस्तुओं का दान करें तो भाग्य में और अधिक चार-चांद लगता है।