आतंकी फंडिंग पर रोक लगाने के लिए विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाने की जरूरत है। क्रिप्टो करेंसी एवं क्राउड फंडिंग का तोड़ कैसे निकाला जाए, इस पर भी विचार करने की आवश्यकता है। आतंकी क्राउड फंडिंग प्लेटफार्म का इस्तेमाल धन जुटाने के लिए करते हैं। हवाला मार्केट के द्वारा भी धन आतंकी संगठनों तक पहुंचता है। देश-विदेश की तमाम सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं। इस गंभीर समस्या पर नई दिल्ली में आयोजित होने वाले दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में आतंकी एवं चरमपंथी गतिविधियों को वित्तीय सहायता रोकने पर मंथन होगा। इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे, जिसमें 75 देशों के मंत्री एवं प्रतिनिधि भाग लेंगे। 19 नवंबर को समापन सत्र को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संबोधित करेंगे। वित्तीय पोषण के लिए आतंकी संगठनों द्वारा औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह की व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है। पारंपरिक वित्तीय सेवाओं के लिए अनौपचारिक सिस्टम कम खर्चीला है। इसके अलावा इसकी तेज स्पीड, भरोसा, उपभोक्ता पहचान, चेक और ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड की कमी और टैक्स चोरी आदि कारण भी इस्तेमाल को प्रोत्साहन दे सकते हैं। इन सब तरीकों से आतंकियों तक आसानी से धन पहुंच रहे हैं। जांच एजेंसियों को इन तक पहुंचना मुश्किल होता है। मनी लांड्रिंग का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों एवं ड्रग्स टैफिकिंग में अधिक होने लगा है। इसके जरिए अपराधियों को गैर कानूनी तरीके से लाभ कमाने का मौका मिलता है। आतंकी तथा दूसरे अपराधी धनशोधन के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। दुनिया के देश क्रिप्टो केरेंसी और क्राउड फंडिंग के तरीके पर रोक लगाने के लिए अपने-अपने तरीके से काम कर रहे हैं। अब आतंक, नशा, हथियार और साइबर क्राइम जैसे अपराध में यही तरीका इस्तेमाल होने लगा है। व्हाट्सएप चैट, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और सोशल मीडिया के दूसरे माध्यम का आतंकियों द्वारा धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। डार्क वेब या डार्क नेट आतंकी गतिविधियों, मनी लांड्रिंग और ड्रग्स की बुकिंग एवं सप्लाई का बड़ा जरिया बन गया है। इसके इस्तेमाल से इंटरनेट पर असली यूजर सामने नहीं आता है। यूजर कहां पड़ है, उसकी ट्रेकिंग और सर्विलांस जांच एजेंसियों के लिए बहुत मुश्किल होता है। साइबर क्राइम को लेकर विश्व स्तर पर कानून और नियमों को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी है। इसको लेकर प्रभावी कानूनी फ्रेम वर्क, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे संस्थानों की मॉनिटरिंग, कंट्रोल और सुधार के लिए पहल करने की आवश्यकता है। पिछले कुछ वर्षों से डार्क वेब जैसे तकनीक का दुरुपयोग बढ़ रहा है। आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए चरमपंथी और जेहादी राजनीतिक एवं सामाजिक सांस्कृृतिक समूहों की आड़ में अपनी गैर कानूनी गतिविधियों को वैध बनाने का प्रयास करते हैं। विश्व स्तर पर मौजूद विद्रोही समूह सांप्रदायिक विवादों से जुड़े रहते हैं। इन समूहों की संतोष जनक संख्या है, जो स्थानीय स्तर पर हमलों को बढ़ावा देते हैं। उम्मीद है कि दिल्ली में ‘नो मनी फॉर टेरर’ पर आयोजित होने वाले सम्मेलन में इस गंभीर विषय पर कोई आम सहमति बनेगी, जिसमें भारत की बड़ी भूमिका होगी।
आतंकी फंडिंग रोकने की तैयारी
