इन दिनों देशभर में गुजरात विधानसभा चुनाव-2022 की खूब चर्चा है। इस चुनावी जंग को जीतने के लिए प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह,भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित पूरी भगवा टीम लग गई है। दूसरी ओर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी ताल ठोंक रही है। ऐसे में कहा जा सकता है कि यह सियासी लड़ाई त्रिकोणीय हो गई है। इसके पूर्व गुजरात में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने रहती थी। वैसे देखा जाए तो दो दशक से ज्यादा समय से गुजरात की सत्ता भाजपा के कब्जे में है। ऐसे में राजनीतिक पंडित यह मानने को बाध्य हैं कि इस बार भी गुजरात में भाजपा की जीत होगी, परंतु लोग यह भी मान रहे हैं कि आम आदमी पार्टी इस चुनावी जंग को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। फिलहाल जोर-शोर के साथ कांग्रेस भी ताल ठोंक रही है,परंतु देश की सबसे पुरानी पार्टी की गतिविधि से नहीं लग रहा है, वह इस रण को अपने नाम करने के लिए लड़ रही है। राजनीति में खानापूर्ति  के लिए भी चुनाव लड़े जाते हैं और कांग्रेस वहां खानापूर्ति के सिवाय और कुछ नहीं कर रही है। दूसरी ओर इस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अच्छी तैयारी की है और उसका दावा है कि वह अगला विधानसभा चुनाव जीतने जा रही है। वैसे में केजरीवाल की पार्टी ने कुछ समय के लिए भाजपा की नींद जरूर उड़ा दी है। कैमरे पर भले ही बीजेपी के नेता अति आश्वस्त दिखते हैं लेकिन कैमरा हटते ही ये नेता स्वीकार करते हैं कि यह बहुत मुश्किल चुनाव है। भाजपा को बीते दो दशकों में गुजरात में किसी भी चुनाव में इतना पसीना नहीं बहाना पड़ा, जितना कि इस बार आप के कारण बहाना पड़ रहा है। आप का तो यहां तक दावा है कि भाजपा की ओर से उसे मैदान से हट जाने के  लिए कई बार दबाव डाला गया, परंतु वह अपने फैसले पर अडिग है और पार्टी मजबूती के साथ चुनाव लड़ रही है। भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि इस बार भाजपा को राहुल गांधी के जोरदार चुनावी अभियान का सामना नहीं करना पड़ रहा है। पिछले चुनाव 2017 में पार्टी को कांग्रेस से जोरदार टक्कर का सामना करना पड़ा था, परंतु इस बार राहुल गांधी की जगह दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने ले ली है और वे लगातार गुजरात की भाजपा सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के नाम पर घेर रहे हैं। साथ ही उन्हें बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा देने का वादा कर रहे हैं। केजरीवाल और सिसोदिया की जनसभाओं में खूब भीड़ इकट्ठा हो रही है। लोग आप  के चुनावी  मुद्दों को पसंद भी कर रहे हैं। दूसरी ओर पीएम  मोदी ने इस बार भी अश्वमेघ के घोड़े को अपनी ओर मोड़ने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। गुजरात में भले ही विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं परंतु वोट मोदी के नाम पर ही मांगा जा रहा है। उधर कांग्रेस भी अपने लोक-लुभावन नारों के साथ मैदान में है। पार्टी अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करके गुजरातवासियों को लुभाने की कोशिश जरूर कर रही है,परंतु समय पर सही तैयारी नहीं होने की वजह से कांग्रेस सत्ता के द्वार से दूर दिख रही है। इस चुनाव अभियान में केजरीवाल मतदाताओं के दिमाग में विकास के ‘गुजरात मॉडल’ को लेकर संशय के बीज बोने में कामयाब दिख रहे हैं। केजरीवाल की रैलियों में आने वाली भीड़ में जोश दिखाई देता है। केजरीवाल जब भी मंच पर आते तो मतदाता वास्तव में उन्हें लेकर उत्साहित दिखते हैं,परंतु वास्तविकता इसके विपरीत है। अब तक जितने सर्वेक्षण आए हैं, उनमें भाजपा बहुमत की ओर जाती दिख रही है। अभी भी कांग्रेस दूसरे नंबर पर कायम है और आप को तीसरे नंबर की पार्टी बताया जा रहा है। कुल मिलाकर गुजरात का विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है। पूरे देश की नजर अब गुजरात चुनाव पर लग गई है। साल के अंत में होने वाले इस चुनाव का बहुत ही महत्व है, इसका असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। साथ ही 2024 में होने वाला लोकसभा चुनाव भी इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा।