चीन अपनी चालबाजी से कभी भी बाज नहीं आता। यही कारण है कि चीन जैसे देश पर कभी भी विश्वास नहीं किया जा सकता। वह अपने स्वार्थ को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। भारत और चीन के बीच दुश्मनी जगजाहिर है। सीमा पर दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी हैं। दोनों ही देश अपनी सामरिक शक्ति बढ़ाने में लगे हुए हैं। भारत लगातार चीनी सीमा के पास अपनी शक्ति को मजबूत कर रहा है। इसके अलावे भारत अपनी परमाणु क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। चीन की तैयारी को देखते हुए भारत को भी जवाबी कार्रवाई के लिए अपने को हमेशा तैयार रखना पड़ेगा। भारत ने जमीन एवं आकाश के साथ-साथ अब पानी से भी परमाणु मिसाइल दागने की क्षमता को विकसित कर रहा है। जमीन एवं आकाश से पहले ही भारत परमाणु शक्ति से लैस कई मिसाइलों का परीक्षण कर सीमा पर तैनात कर चुका है। अब भारत पानी से परमाणु मिसाइल दागने की क्षमता बढ़ाने के लिए परीक्षण कर रहा है। हाल ही में परमाणु पनडुब्बी अरिहंत से बैलेस्टिक मिसाइल से परीक्षण किया गया था। ऐसी खबर है कि भारत अब 10-11 नवंबर को परमाणु क्षमता से लैस के-4 मिसाइल का परीक्षण करेगा जिसकी मारक क्षमता लगभग 3500 कि.मी. बतायी जाती है। अगर यह परीक्षण सफल हो गया तो इसके दायरे में पाकिस्तान के साथ-साथ पूरा चीन आ जाएगा। दुश्मन देश द्वारा पहले परमाणु हमला करने की स्थिति में पानी से परमाणु हमला करना ज्यादा सुरक्षित होता है, क्योंकि दुश्मन देश को यह पता नहीं चलता कि कहां से हमला हो रहा है। भारत ने इस परीक्षण के लिए एक नोटिस जारी कर बंगाल की खाड़ी तथा हिंद महासागर के क्षेत्रों को नो-फ्लाई जोन घोषित कर रहा है। भारत के इस टेस्ट से घबराए चीन ने इसके बारे में जानकारी हासिल करने के लिए अपने जासूसी जहाज यूआन वांग-6 को हिंद महासागर में भेजा है। यह जहाज इंडोनेशिया के बाली तट से आगे बढ़ चुका है। यह जहाज मिसाइल की क्षमता, सटीकता एवं रेंज के बारे में जानकारी को टै्रक कर सकता है। भारतीय नौसेना स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरी तरह चौकस है। अगर जासूसी जहाज भारत के एक्सक्लूसिव समुद्री जोन में प्रवेश करने की कोशिश करेगा तो इसका सामना भारतीय नौसेना होना तय है। यही कारण है कि यह जहाज धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। देखना है कि यह जहाज बांग्लादेश या श्रीलंका के किसी बंदरगाह पर रुककर जासूसी की कोशिश करता है या कोई दूसरा रास्ता अपनाता है। मालूम हो कि पिछले अगस्त में चीन का जासूसी जहाज युआन वांग-5 दक्षिण भारत स्थित भारतीय नौसेना एवं वायुसेना के ठिकानों की जासूसी के लिए श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर करीब एक सप्ताह तक रुका हुआ था। भारत चीन को माकूल जवाब देने के लिए हरसंभव तैयारी करने में जुटा हुआ है। श्रीलंका ने कर्जजाल में डूबने के कारण चीन को हंबनटोटा बंदरगाह 99 साल के लीज पर सौंप दिया है। गृहयुद्ध के समय भारत द्वारा काफी मदद किए जाने के बावजूद श्रीलंका भारत के खिलाफ चालबाजी कर रहा है। भारत सरकार की पूरे मामले पर नजदीकी नजर है। भारत हर कीमत पर अपने परमाणु मिसाइल का परीक्षण करके ही रहेगा। डीआरडोओ नए-नए मिसाइलों का परीक्षण कर लगातार चीन पर दबाव बनाए हुए है। भारत के साथ-साथ चीन के पड़ोसी देश भी अब चीन की विस्तारवादी नीति के खिलाफ उठ खड़े हुए हैं। भारत द्वारा चीन को करारा जवाब दिए जाने के बाद उसके पड़ोसी देशों को भी अब विरोध करने की हिम्मत आ गई है। भारत को कभी भी चीन पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
चीन की जासूसी
