बिहार की मोकामा सीट पर राजद उम्मीदवार नीलम देवी को जीत मिली है, वहीं गोपालगंज से बीजेपी प्रत्याशी ने बाजी मारी है। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बीजेपी के उम्मीदवार गोला गोकर्णनाथ सीट से चुनाव जीत गए हैं। हरियाणा की आदमपुर सीट से भाजपा उम्मीदवार भव्य बिश्नोई को जीत मिली है। महाराष्ट्र की अंधेरी पूर्व सीट से उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना उम्मीदवार ऋतुजा लटके को जीत मिली है। तेलंगाना के मुनूगोड़े सीट पर कड़ी टक्कर में टीआरएस ने भाजपा को पराजित कर दिया है। ओडिशा की धामनगर सीट से भाजपा उम्मीदवार सूर्यबंशी सूरज जीते हैं। इन सभी सातों सीटों के लिए तीन नवंबर को वोट डाले गए थे। जिन विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए उनमें भाजपा के पास तीन, कांग्रेस के पास दो और शिवसेना एवं राजद के पास एक-एक सीट थीं। बिहार की गोापलगंज विधानसभा सीट पर आरजेडी को बीजेपी से करीबी मुकाबले में हार मिली है। बीजेपी प्रत्याशी कुसुम देवी ने आरजेडी के मोहन प्रसाद गुप्ता को महज 1789 वोटों से हराया। महागठबंधन में शामिल जेडीयू-कांग्रेस समेत अन्य पार्टियों के समर्थन के बावजूद आरजेडी उम्मीदवार की हार होने का मुख्य कारण बीजेपी नहीं बल्कि कोई और है। गोपालगंज में आरजेडी की नैया डुबोने वाले डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के मामा साधु यादव और असदुद्दीन ओवैसी हैं। 24 राउंड की काउंटिंग के बाद गोपालगंज में बीजेपी उम्माीदवार कुसुम देवी को 41.6 फीसदी यानी 70053 वोट मिले। दूसरे नंबर पर रहे आरजेडी प्रत्याशी मोहन प्रसाद गुप्ता को भी 40.53 फीसदी यानी 68,259 मत हासिल हुए। हार का अंतर महज 1789 वोट रहा। इस सीट पर तीसरे नंबर पर ओवैसी की पार्टी एआईएमएम के प्रत्याशी अब्दुल सलाम को 12 हजार वोट मिले। इसके बाद बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं साधु यादव की पत्नी इंदिरा यादव को भी 8854 मत हासिल हुए। गोपालगंज में आरजेडी की हार का प्रमुख कारण डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की मामी इंदिरा देवी रहीं। बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं इंदिरा ने महागठबंधन के वोटबैंक में सेंध लगाई और 8800 से ज्यादा वोट काटे। इस वजह से आरजेडी को बहुत कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इसी तरह ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के प्रत्याशी ने भी 12 हजार से ज्यादा वोट हासिल कर आरजेडी का खेल बिगाड़ दिया। एआईएमआईएम ने भी आरजेडी के वोटों में सेंधमारी की और बीजेपी करीबी मुकाबले में जीत गई। वोटिंग से पहले तेजस्वी यादव ने ओबैसी को बीजेपी की बी टीम बताया था। यदि इस उपचुनाव के संदेश पर नजर डाले तो स्पष्ट है कि बिहार में भाजपा पहले की अपेक्षा ज्यादा कमजोर हुई है। कारण कि गोपालगंज में यदि बसपा और एआईएमएम के उम्मीदवार भाजपा के डमी कैंडिडेट की भूमिका नहीं निभाते तो इस बार गोपालगंज से राजद की जीत निश्चित थी। ऐसे में कहा जा रहा कि इस बार राजद का माई समीकरण काम नहीं आया,वहां मुसलमानों के कुछ वोट ओबैसी की पार्टी को चले गए तो दूसरी ओर यादव समाज के वोट भी राजद और बसपा के बीच बंट गए। महाराष्ट्र से जो परिणाम सामने आए हैं,उनसे स्पष्ट होता है कि वहां शिवसेना का मतलब उद्धव ठाकरे है और इस बार वहां उसके उम्मीदवार को ही जीत मिली है, जबकि हरियाणा के आदमपुर में भाजपा नहीं, बल्कि भव्य विश्वनोई के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल की तीसरी विरासत जीती है। तेलंगना में भले ही टीआरएस का उम्मीदवार जीत गया है, परंतु भाजपा के उम्मीदवार को जितने वोट मिले हैं, उनसे स्पष्ट है कि हैदराबाद के आस-पास भाजपा तेजी से मजबूत हो रही है। यूपी में भाजपा की जीत से साबित हो गया कि यूपी में योगी आदित्य नाथ मजबूती के साथ शासन चला रहे हैं और आम लोगों में उनकी मजबूती बरकरार है।
उपचुनाव के संदेश
