हिमाचल प्रदेश के बाद अब गुजरात में भी चुनावी रणभेरी बज चुकी है। चुनाव आयोग ने गुजरात में दो चरणों में मतदान कराने की घोषणा की है। पहला चरण का 1 दिसंबर तथा दूसरे चरण का मतदान 5 दिसंबर को होगा। हिमाचल प्रदेश एवं गुजरात दोनों राज्यों की मतगणना 8 दिसंबर को होगी तथा उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा के 89 सीटों के लिए 1 दिसंबर को तथा बचे 93 सीटों पर 5 दिसंबर को मतदान होगा। किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 92 विधायकों की जरूरत होगी। गुजरात के 4 करोड़ 90 लाख मतदाता उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इस बार 3 लाख 24 हजार नए मतदाता शामिल किए गए हैं। पिछले विधानसभा  चुनाव में भाजपा को 99, कांग्रेस को 77 तथा निर्दलीय को छह विधानसभा क्षेत्र में जीत हासिल हुई थी। सबसे ज्यादा मध्य गुजरात में 68 सीटें हैं, जबकि कच्छ में 54, उत्तर गुजरात में 32 तथा दक्षिण गुजरात में 28 सीटें हैं। अब तक गुजरात में कांग्रेस तथा भाजपा के बीच मुकाबला होता रहा है, लेकिन इस बार राजनीतिक परिवेश बदल चुका है। आम आदमी पार्टी  (आप) ने पंजाब की जीत से उत्साहित होकर गुजरात में पूरी शक्ति के साथ चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल तथा आप के दूसरे नेता लगातार सत्ताधारी भाजपा पर हमलावर हैं। हालांकि गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी कार्यक्रमों की घोषणा अब हुई है, किंतु पहले से ही वहां चुनावी माहौल बन चुका है। यह सबको मालूम था कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद किसी भी वक्त गुजरात के लिए भी चुनावी शंखनाद हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गृह राज्य होने के कारण गुजरात का चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। प्रधानमंत्री लगातार गुजरात के दौरे पर हैं तथा कई लोक-लुभावन योजनाओं की घोषणा भी कर चुके हैं। मोरबी पुल हादसा भाजपा के लिए निश्चित रूप से चिंता का विषय है। कांग्रेस तथा आप सहित दूसरी राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे पर गुजरात की भाजपा सरकार को घेरने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देगी। यही कारण है कि प्रधानमंत्री इस घटना के तुरंत बाद पूरी तरह एक्शन में आ गए। उन्होंने घटनास्थल का दौरा कर पीड़ित परिवारों को आश्वासन दिया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। कांग्रेस भी गुजरात चुनाव के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है। अगर कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के बीच मतों का बंटवारा हुआ तो इसका लाभ निश्चित रूप से भाजपा को मिलेगा। चुनाव से पहले भाजपा हाई कमान ने गुजरात के मुख्यमंत्री सहित उनकी पूरी कैबिनेट को बदल दिया है। अब बारी उम्मीदवारों को लेकर है। पार्टी द्वारा कराये गए आंतरिक सर्वे में ऐसी रिपोर्ट है कि भाजपा के अनेक विधायकों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है। ऐसी स्थिति में टिकट बंटवारे के दौरान ऐसे विधायकों पर गाज गिरनी निश्चित है। इसके लिए पार्टी में मंथन भी शुरू हो चुका है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल से ज्यादा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए गुजरात चुनाव अग्नि-परीक्षा है। अगर हिमाचल प्रदेश एवं गुजरात की गद्दी की रक्षा भाजपा कर सकती है तो इसका लाभ अगले लोकसभा चुनाव तथा उससे पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी को लाभ मिल सकता है। अगले वर्ष 10 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भारत जोड़ो यात्रा के बाद कांग्रेस गुजरात में अपना दमखम दिखाना चाहती है, किंतु उसके रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा आम आदमी पार्टी बन रहा है। भाजपा ने गुजरात चुनाव से पहले राज्य के दो जिलों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं बांग्लादेश से आए हिंदुओं सहित दूसरे अल्पसंख्यकों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत नागरिकता देने की पहल शुरू की है। भाजपा के इस कदम से हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण होगा जिसका फायदा भाजपा को मिलेगा। भाजपा गुजरात के चुनाव में पूरी ताकत झोंक रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए भी गुजरात का चुनाव महत्वपूर्ण है। अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में है। यहां के चुनाव पर देश-विदेश की नजर रहेगी, क्योंकि इसे मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जाएगा।