संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद विरोधी समिति की दो दिवसीय बैठक में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया। पहली बार अमरीका से बाहर भारत में इस समिति की बैठक हुई, जिसमें सुरक्षा परिषद के सभी 15 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। दिल्ली घोषणा-पत्र में आतंकवाद को वैश्विक चुनौती के रूप लिया गया है, जिसमें आतंकियों को दिये जाने वाले वित्त-पोषण को भी शामिल किया गया है। बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को पूरी तरह बेनकाब कर दिया। बैठक के दौरान भारत ने एक ऑडियो टैप चलाया जिसमें पाकिस्तानी आतंकी साजिद मीर की आवाज सुनाई गई, जिसमें वह 26/11 के आतंकियों को पाकिस्तान में बैठकर निर्देश दे रहा था। साजिद मीर कसाब को भीड़-भाड़ वाले इलाके में अंधाधुंध फायरिंग कर लोगों को मारने का निर्देश दे रहा था। मालूम हो कि वर्ष 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले में अनेक लोगों की जान गई थी, जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे। आतंक विरोधी समिति की बैठक के दौरान आतंकियों द्वारा इंटरनेट और सूचना एवं प्रौद्योगिकी तकनीक के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। भारत ने कहा कि आतंकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर अफवाह फैलाने तथा लोगों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। 28 एवं 29 अक्तूबर को हुई बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आतंकवाद आंतरिक एवं बाहरी दोनों तरह की चुनौतियां पैदा कर रहा है। आतंकी अपने काम से समाज एवं देश को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। पहले दिन की बैठक मुंबई के ताज होटल में हुई जहां आतंकियों 26/11 की घटना को अंजाम दिया था। आतंकवाद को धर्म, राष्ट्रीयता, क्षेत्रीयता एवं किसी दूसरे चश्मे से नहीं देखा जा सकता। आईएस एवं अलकायदा जैसे आतंकी लगातार दुनिया के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। अब तो आतंकी ड्रोन एवं साइबर हमले जैसे तकनीक का सहारा लेने लगे हैं। ऐसी स्थिति में सभी देशों को मिलकर इसका मुकाबला करना होगा। कुछ देश अपने निहित स्वार्थ के लिए अच्छा एवं बुरा आतंकवाद की परिभाषा देने में लगे हैं। चीन एवं पाकिस्तान जैसे देश भारत को परेशान करने के लिए अपने नजरिए से आतंकवाद की व्याख्या करने में लगे हैं। पाकिस्तान में सक्रिय कट्टïर आतंकवादियों को भी चीन अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने से बचा रहा है, क्योंकि उसका हित पाकिस्तान में निहित है। अमरीका सहित पश्चिमी देश भी आतंकवाद पर भारत की आवाज को अनसुना कर रहे थे, लेकिन जब अमरीका में आतंकी हमला हुआ तब पश्चिमी देशों को भी इस खतरे का एहसास होने लगा। चीन जैसा देश अभी भी इस खतरे को समझने को तैयार नहीं है। भारत के विदेश मंत्री ने इस बैठक में जिस तरह आतंकवाद के मुद्दे पर चीन एवं पाकिस्तान जैसे देश को कठघरे में खड़ा किया उससे दुनिया का ध्यान निश्चित रूप से इस तरफ आकर्षित हुआ है। संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव ने भी यह महसूस किया है कि आतंकवाद पर अब सख्ती से कार्रवाई करने की जरूरत है। दिल्ली घोषणा-पत्र में जिस तरह की सहमति बनी है उससे यह साबित होता है कि दुनिया के देश इससे चिंतित हैं। भारत शुरू से ही आतंकवाद से पीडि़त है तथा वह इसका डटकर मुकाबला कर रहा है।