स्वतंत्रता के बाद भारत धीरे-धीरे चहुंमुखी विकास कर रहा है। आज लगभग दैनिक उपयोग की सारी वस्तुओं का निर्माण अपने देश में ही होता है, जिन वस्तुओं के लिए पहले हम दूसरों पर निर्भर रहते थे,अब उनका उत्पादन हमारे देश में ही होता है । कृषि क्षेत्र में भी हमें आशातीत सफलता मिली है। आज देश में आधुनिक वैज्ञानिक ढंग से कृृषि उत्पादन होता है,परंतु हर क्षेत्र में इतनी प्रगति के साथ हमारी वस्तुओं के मूल्य स्थिर नहीं हो पाते हैं। खाद्य पदार्थ, वस्त्र तथा अन्य वस्तुओं की कीमत दिन-प्रति-दिन इस प्रकार बढ़ती जा रही है कि वह उपभोक्ताओं की कमर तोड़ रही है, परंतु फिलहाल महंगाई की मार सिर्फ भारत में ही नहीं है। महंगाई न केवल भारत,बल्कि दुनिया भर के देशों में मुसीबत बनी हुई है। दुनिया में महंगाई से सबसे ज्यादा त्रस्त तुर्की है, जहां महंगाई दर 83.4 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है। नीदरलैंड में13.7 फीसदी, रूस में 11.9 फीसदी, इटली में 10.4 फीसदी महंगाई दर दर्ज की गई है। ब्रिटेन में भी महंगाई रिकॉर्ड तोड़ 10.1 फीसदी पर है। इसके अलावा दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले अमरीका में सालाना आधार पर महंगाई 8.2 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है। सूची में आगे नजर डालें तो साउथ अफ्रीका में सालाना आधार पर महंगाई दर में 7.5 फीसदी का इजाफा हुआ है, वहीं भारत 10वें नंबर पर है और यहां महंगाई दर 7.4 फीसदी है। भारत के बाद ऑस्ट्रेलिया में 7.3 फीसदी, ब्राजील में 7.1 फीसदी, कनाडा में 6.9 फीसदी, फ्रांस में 6.2 फीसदी, इंडोनेशिया में 5.9 फीसदी और दक्षिण कोरिया में 5.6 फीसदी की दर से महंगाई बढ़ी है। सूची में शामिल ऐसे देशों की बात करें जहां सालाना आधार पर महंगाई दर में कम बढ़ोतरी देखने को मिली है, तो इनमें चीन, जापान और सउदी शामिल हैं। सउदी में दर 3.1 फीसदी, जबकि जापान में यह 3 फीसदी रही है। चीन में सबसे कम रफ्तार से महंगाई में इजाफा हुआ है और यहां आंकड़ा 2.8 फीसदी रहा। भारत की बात करें तो लगातार तीन तिमाहियों से देश में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर आधारित रिटेल इनफ्लेशन रिजर्व बैंक के निर्धारित 6 फीसदी के टारगेट से ऊपर बनी हुई है। सितंबर में यह 7.41 फीसदी रही। भारत में महंगाई और कई कारण हैं यहां लगभग सभी वस्तुओं का उत्पादन होता है, परंतु उसका उत्पादन इतना नहीं हो पाता कि वह जनता को उचित मूल्य पर पूर्ण मात्रा में मिल सकें। उनकी पूर्ति की कमी से मांग बढ़ती है और मांग के बढऩे से मूल्य का बढऩा भी स्वाभाविक है। कभी-कभी किसी वस्तु की उत्पादन लागत इतनी बढ़ जाती है कि उपभोक्ता तक उसकी कीमत बहुत बढ़ जाती है,क्योंकि उसके उत्पादन में सहायक सामग्रियों के लिए हमें विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है। कच्चे माल के लिए विदेशों की ओर ताकना पड़ता है। यातायात व्यय बढ़ जाता है जिससे सब ओर से उसकी उत्पादन लागत बढ़ जाती है । आज मूल्यवृद्धि का सबसे बड़ा कारण है उत्पादकों में राष्ट्रीय भावना का अभाव है। हमारा उद्योगपति राष्ट्रीय भावना से वस्तुओं का उत्पादन नहीं करता है। उसके अंदर अधिक लाभ कमाने की भावना अधिक होती है इसके लिए चाहे उसको राष्ट्र व समाज का अहित भी करना पड़ जाए तो वह अपने लाभ के लिए राष्ट्रीय हितों की बलि कर देता है। यही कारण है कि आज देश में महंगाई बढ़ रही है और घटिया वस्तुओं के उत्पादन से विश्व बाजार में भारत की साख गिरती जा रही है। देश में जनसंख्या वृद्धि के कारण भी महंगाई बढ़ती जा रही है । उत्पादन सीमित है, उपभोक्ता अधिक हैं । देश की खेतिहर भूमि सिकुड़ती जा रही है । जनसख्या की वृद्धि के कारण नगरी, शहरी का विस्तार होता जा रहा है । खेतिहर भूमि में मकान बन रहे हैं । जंगलों का भी विस्तार किया जा रहा है । जिससे कृषि उत्पादन में स्वाभाविक रूप से कमी हो रही है । खाद्य पदार्थों के लिए हमें विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है। विदेशों से वस्तुओं के आयात का भार उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है फलत: महंगाई बढऩे लगती है। हमारे यहांं वस्तुओं की वितरण प्रणाली भी दोष-पूर्ण है । कुल मिलाकर महंगाई के कई कारण है, इन कारणों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
वैश्विक महंगाई
