कांग्रेस के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने बुधवार को विधिवत रूप अपना कार्यभार संभाल लिया है। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनको अपना कार्यभार सौंपने के बाद कहा कि उम्मीद है कि खडग़े के नेतृत्व में कांग्रेस और मजबूत होगी। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि अध्यक्ष कार्यभार सौंपकर मैं राहत महसूस कर रही हूं। वर्ष 1969 में कांग्रेस में शामिल होकर अपना राजनीतिक अभियान शुरू करने वाले खडग़े 1972 में कर्नाटक से विधायक बने। वर्ष 2005 में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में काम किया। वर्ष 2009 एवं 2014 में लोकसभा का चुनाव जीते, किंतु 2019 में लोकसभा का चुनाव हार गए। खडग़े गांधी परिवार के काफी विश्वास-पात्र माने जाते हैं। इसका इनाम भी उनको समय-समय पर मिलता रहा है। 2014 में वे लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता थे। 2019 में चुनाव हारने के बाद कांग्रेस हाई कमान ने उनको राज्यसभा से टिकट देकर सांसद बनाया। 2020 से वे राज्यसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता के पद पर कार्यरत थे। कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी शशि थरूर को 6000 से ज्यादा मतों से पराजित किया। अब पार्टी की कमान संभालने के साथ ही उनके समक्ष पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी चुनौती आने वाली है। सबसे बड़ी चुनौती उनको स्वतंत्र होकर फैसला लेने को लेकर है। अब तक कांग्रेस गांधी परिवार के इशारे पर चलता रहा है। पिछले 24 वर्षों से गांधी परिवार का सदस्य ही कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर विराजमान रहा है। अगर वे मनमाफिक फैसला नहीं ले पाते हैं तो इसका प्रभाव पार्टी पर निश्चित रूप से पड़ेगा। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा वरिष्ठ नेता सचिन पायलट के बीच महाभारत चल रहा है। शशि थरूर भी अपनी बयानबाजी से चर्चा में हैं। महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायकों के बीच असंतोष चरम पर है। ऐसी स्थिति में पार्टी में पड़ रही फूट को रोकना तथा सबको एकजुट करना उनके सामने दूसरी बड़ी चुनौती होगी। उदयपुर में आयोजित कांग्रेस के चिंतन शिविर में कुछ अहम फैसले लिये गए थे। छह माह बीत जाने के बाद भी उसे कार्यान्वित नहीं किया जा सका है। उस शिविर में यह फैसला लिया गया था कि राष्ट्रीय स्तर से लेकर मंडल स्तर तक कांग्रेस समितियों में 50 प्रतिशत ऐसे नेताओं को शामिल किया जाएगा, जिनकी उम्र 50 वर्ष से कम हो। इसके अलावा पार्टी के विभिन्न पदों पर पांच वर्ष या उससे अधिक समय से जमे नेताओं को हटाकर नए चेहरों को मौका दिया जाएगा। अब खडग़े के समक्ष उदयपुर चिंतन शिविर की अनुशंसा को लागू करने का समय आ गया है। खडग़े ने इस योजना को लागू करने की पहल शुरू की है। जनता में गिरती साख को बचाने के लिए नया विश्वास पैदा करने एवं नए लोगों को पार्टी से जोडऩे के लिए काम करना होगा। इस काम में कहां तक सफल होंगे यह तो समय बताएगा। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए घोषणा हो चुकी है। गुजरात में जल्द ही चुनावी घोषणा होने वाली है। वर्ष 2023 में कर्नाटक सहित दस राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। इसके अलावा वर्ष 2024 में सात राज्यों के साथ लोकसभा का चुनाव भी होना है। इन चुनावों में कांग्रेस की साख बचाना उनके सामने अग्नि परीक्षा होगी। देश में अभी केवल दो राज्यों राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ में ही कांग्रेस का शासन है। लोकसभा एवं राज्यसभा में कांग्रेस सांसदों की संख्या लगातार घट रही है। एक समय पूरे देश में शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी की स्थिति काफी कमजोर हो गई है। हाल ही में पंजाब में विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है। कांग्रेस की लगातार खोती जा रही राजनीतिक जमीन को वापस पाने के मामले में खडग़े की कार्यकुशलता एवं अनुभव की कड़ी परीक्षा होने वाली है। अगर राहुल गांधी उनके कामकाज में हस्तक्षेप करते हैं तो फिर कांग्रेस को संभालना उनके लिए टेढ़ी खीर साबित होगी। अब आगे समय बताएगा कि खडग़े कांग्रेस को कितना सशक्त कर पाते हैं?
खडग़े की चुनौतियां
