ब्रिटेन में पहली बार भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक ऋषि सुनक को प्रधानमंत्री बनाया गया है। सत्ताधारी कंजरवेटिव द्वारा इनके नाम की घोषणा के बाद ब्रिटेन के किंग चाल्र्स (तृतीय) ने सुनक को प्रधानमंत्री पद के लिए नियुक्ति पत्र सौंपा तथा नई सरकार बनाने को कहा। ब्रिटेन के इतिहास में सुनक सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री होंगे। कंजरवेटिव पार्टी के 357 सांसदों में से आधे से ज्यादा सांसदों का इनको समर्थन प्राप्त है। ऋषि सुनक इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति के दामाद हैं। इन्होंने अपना राजनीतिक कैरियर वर्ष 2015 से शुरू किया था। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के इस्तीफे के बाद भी सुनक प्रधानमंत्री की दौर में थे। लेकिन उस वक्त लिज ट्रस ने बाजी मार ली तथा वह इंग्लैंड की प्रधानमंत्री बन गई। इंग्लैंड की बिगड़ती आर्थिक स्थिति एवं बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने में ट्रस पूरी तरह विफल रही। जनता के बीच उनका विरोध बढऩे लगा। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए सत्ताधारी पार्टी के सांसद भी नाराज होने लगे। वर्तमान स्थिति में सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से गिर रहा है। बाध्य होकर लिज ट्रस को केवल 45 दिन के भीतर अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इस पद के लिए एक और दावेदार पेनी मार्डट द्वारा अपना नामांकन वापस लेने के बाद सुनक का रास्ता आसान हुआ। भारतीय मूल की एक और नेता एवं पूर्व वित्त मंत्री प्रीति पटेल, कैबिनेट मंत्री जेम्स क्लेवर्ली एवं नदीम जहावी  ने भी अपना पाला बदल कर सुनक को समर्थन दिया था। मालूम हो कि ब्रिटेन में लगभग 17 लाख प्रवासी भारतीय रहते हैं, जो वहां की जनसंख्या का केवल 2.5 प्रतिशत है। सुनक के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिगड़ती आर्थिक व्यवस्था को पटरी पर लाना है। उन्होंने अपने पहले भाषण में कहा है कि देश में स्थिरता एवं एकता लाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए एकजुटता जरूरी है तभी जाकर सफलता पायी जा सकती है। सुनक के आने से भारत और ब्रिटेन के संबंध और मजबूत होंगे। दोनों देशों के बीच वीजा को लेकर हो रही समस्या का हल निकल सकेगा। भारत से पढ़ाई एवं नौकरी के लिए जाने वाले लोगों के लिए वीजा की प्रक्रिया सरल बनानी होगी। भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता के लिए बातचीत चल रही है। इसको लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बना हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री लिज ट्रस मुक्त व्यापार समझौते के प्रति उदासीनता दिखा रही थी। अब उम्मीद है कि सुनक के आने के बाद इसमें तेजी आएगी। सुनक ने अपने बयान में पहले ही कहा है कि वे भारत के साथ और करीबी रिश्ता बनाना चाहते हैं।  लेकिन सुनक के सामने अपनी सीमाएं भी होंगी। भारतीय मूल के होने के कारण उन पर भारत के साथ ज्यादा सहयोग करने का आरोप भी लग सकता है। ब्रिटेन का नागरिक होने के कारण सुनक पर वहां के हितों को देखने की जिम्मेवारी होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ट्ïवीट कर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया है। ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों ने जश्न मनाकर सुनक का स्वागत किया है। आर्थिक मंदी से जूझ रहे ब्रिटेन को बड़े बाजार की जरूरत है, जो भारत में उपलब्ध है। यूरोपीय यूनियन से अलग होने के बाद ब्रिटेन को अपने व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए नए जमीन की तलाश करनी पड़ रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध को देखते हुए ब्रिटेन को अपनी रणनीति फिर से तय करनी होगी। ब्रिटेन अमरीका का सबसे मजबूत साझेदार है। ऐसी स्थिति में उसे यूक्रेन को मजबूती से समर्थन करना होगा, जिसका खामियाजा उठाना पड़ रहा है। तेल एवं प्राकृतिक गैस की किल्लत का सामना ब्रिटेन को करना पड़ रहा है। उम्मीद है कि सुनक के आने के बाद ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।