भारत और रूस की दोस्ती हर समय कसौटी पर खड़ी उतरी है। यही कारण है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने कभी भी रूस के खिलाफ कोई बयानबाजी नहीं की। उलटे भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीदारी कर रूस की अर्थ-व्यवस्था को मजबूत किया, जबकि अमरीका सहित पश्चिमी देश लगातार प्रतिबंधों की झड़ी लगा रहे हैं। पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद भारत रूस के प्रति अपनी पुरानी नीति से टस-मस नहीं हुआ। हाल ही में उज्बेकिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद रूस ने अपना नक्शा जारी किया है, जिसमें पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) एवं आक्साई चीन सहित अरुणाचल प्रदेश को भारत के नक्शे के भीतर दिखाया गया है, जबकि चीन द्वारा जारी नक्शे में पीओके के साथ-साथ भारत के कुछ हिस्से को भी अलग दिखाया गया है। रूस ने इस नक्शे के द्वारा यह साबित कर दिया है कि वह भारत का सबसे बड़ा हितैषी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान और चीन दोनों एससीओ के सदस्य हैं। रूस एसएसओ का संस्थापक सदस्य है। अत: उसके द्वारा उठाया गया यह कदम काफी महत्वपूर्ण है। हालांकि रूस ने एससीओ देशों का नक्शा जारी कर अमरीका को यह दिखाने का प्रयास किया है कि उसके साथ सभी देश एकजुट हैं। चीन और पाकिस्तान हमेशा भारत के खिलाफ रहे हैं। चीन भारत-पाक की दुश्मनी का फायदा उठाते हुए हमेशा पाकिस्तान को भारत के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उकसाता रहता है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लश्कर-ए-तैयबा के मौलवी विंग के प्रमुख तथा हाफीज सईद के बेटे हाफिज तल्हा सईद को प्रतिबंधित आतंकियों की सूची में लाने के लिए भारत और अमरीका ने एक प्रस्ताव लाया था। चीन ने इस प्रस्ताव पर वीटो लगाकर पारित नहीं होने दिया। मालूम हो कि हाफिज सईद 26 नवंबर 2008 में हुए मुंबई ब्लास्ट का मुख्य साजिशकर्ता है। चीन इससे पहले चार बार भारत के प्रस्ताव पर वीटो लगाकर पाक समर्थित आतंकियों को प्रतिबंधित होने से बचा लिया। इससे पहले फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन के उपाध्यक्ष शाहिद महमूद, अब्दुल रहमान मक्की, अब्दुल रउफ अजहर एवं साजिद मीर जैसे खूंखार आतंकियों को प्रतिबंधित होने से बचाया था। आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान एवं चीन के स्वर एक समान हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत की भूमिका से नाखुश अमरीकी राजदूत ने पीओके का दौरा कर उसे आजाद कश्मीर तक बता दिया है। जर्मनी ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान यहां तक कह दिया कि कश्मीर समस्या का समाधान संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में होना चाहिए। जर्मन विदेश मंत्री ने आश्वासन दिया कि उनका देश इस मामले में संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की मदद करेगा। अमरीका एवं जर्मनी के बयान को देखते हुए ऐसा लगता है कि भारत ने यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस की मदद कर सही कदम उठाया है। अमरीका तथा पश्चिमी देशों पर कभी भी विश्वास नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा आतंकियों को प्रतिबंधित करने से उनकी संपत्ति को जब्त करने, यात्रा एवं अस्त्र-शस्त्र पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार मिल जाता है। रूस ने ताजा नक्शा जारी यह साबित कर दिया कि वह हर परिस्थिति में भारत के साथ खड़ा रहेगा।
रूस की सदाबहार दोस्ती
