चीन जैसे कुटिल पड़ोसी पर कभी भी विश्वास नहीं किया जा सकता है। उसकी कथनी और करनी में हमेशा फर्क रहता है, जो समय-समय पर सामने आता रहा है। एक तरफ वह भारत के साथ शांति एवं सहयोग की बात करता है तो दूसरी तरफ पीठ में छुरा घोंपने से भी कभी कतराता नहीं है। इसका उदाहरण पिछले रविवार को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं कांग्रेस में सुनने को मिला। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कांग्रेस को संबोधित करते हुए गलवान घाटी में हुई झड़प को इस तरह से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जैसे चीन ने भारत पर फतह कर ली है। जब जिनपिंग कांग्रेस को संबोधित कर रहे थे उस वक्त गलवान घाटी में तैनात चीन के तत्कालीन कमांडर को आमंत्रित किया गया था। यह सबको मालूम है कि गलवान झड़प में चीन के ज्यादा जवान हताहत हुए थे। जिनपिंग के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत-चीन सीमा पर आगे भी चुनौती कम नहीं होने वाली है। चीन अपनी विस्तारवादी नीति को छोडऩे को तैयार नहीं है। उस कांग्रेस में घरेलू अर्थ-व्यवस्था पर राजनीति एवं सुरक्षा को तरजीह दी गई है। अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की अर्थ-व्यवस्था भी किसी चुनौती से कम नहीं है। हाल ही में रियल इस्टेट उद्योग चरमरा गया है। सेमीकंडक्टर उद्योग में भी अमरीका एवं भारत से चुनौती मिल रही है। कोरोना काल के बाद चीन के सामने अंतर्राष्ट्रीय चुनौती बढ़ी है, क्योंकि कई देश अब चीन को अलग-थलग करने में जुट गए हैं। जिनपिंग के भाषण से ऐसा लगा जैसे भू-राजनीतिक तनावों के बीच चीन अपनी विस्तारवादी जिद्द को छोडऩे को तैयार नहीं होगा। 16 अक्तूबर से चल रहे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के कांग्रेस में जिनपिंग और मजबूती के साथ उभर कर सामने आएंगे। तीसरी बात उनका राष्ट्रपति चुना जाना लगभग तय है। माओ के बाद जिनपिंग दूसरे ऐसे नेता होंगे जो आजीवन राष्ट्रपति रह सकते हैं। जिनपिंग के और मजबूत होने से भारत के समक्ष खतरा और बढ़ेगा। चीन अपने को एशिया का नेता बनना चाहता है जिसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा भारत है। भारत के साथ-साथ चीन का ताइवान, फिलीपींस, वियतनाम, जापान सहित कई पड़ोसी देशों के साथ विवाद चल रहा है। अमरीका चीन के पड़ोसी देशों के साथ खड़ा होकर उसकी मदद कर रहा है, जिससे अमरीका और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। चीन की विस्तारवादी नीति को रोकने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अमरीका ने भारत, जापान और आस्ट्रेलिया के साथ मिलकर क्वाड नामक संगठन का गठन किया है। यह संगठन मिलकर चीन को घेरने के लिए कदम उठा रहा है। क्वाड काफी हद तक चीन पर दबाव डालने में सफल रहा है। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारत और चीन के बीच तनाव बना हुआ है। गलवान घाटी, गोगरा हाइट्ïस एवं हॉटस्प्रिंग इलाके से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी हैं, किंतु अभी भी देमचौक, देप्सांग एवं अन्य क्षेत्रों में तनाव बरकरार है। भारत को चीन की तरफ से होने वाली हरकतों पर सजग रहना होगा तथा अपनी जवाबी तैयारी जारी रखनी होगी।
चीन की मंशा पर उठते सवाल
