हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। चुनाव आयोग ने 12 नवंबर को मतदान कराने की घोषणा की है। 8 दिसंबर को मतगणना होगी। इसी के साथ गुजरात विधानसभा के लिए भी किसी भी वक्त चुनाव की घोषणा हो सकती है। दोनों ही राज्यों के विधानसभा का चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। गुजरात में पहले ही पार्टी हाई कमान ने नेतृत्व परिवर्तन कर दिया है, ताकि लोगों की नाराजगी को कम किया जा सके। पंजाब विधानसभा के चुनाव में शानदार जीत से उत्साहित होकर आम आदमी पार्टी (आप) ने गुजरात पर अपना पूरा फोकस किया हुआ है। आप के संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुनाव में जीत हासिल करने के लिए जनता के साथ कई लोक लुभावन वादे कर चुके हैं। आप गुजरात में धुआंधार प्रचार कर रही है। प्रचार के दौरान आप के नेतागण शब्दों की मर्यादा को भी भूल रहे हैं। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में आप का जनाधार बढऩे से कांग्रेस को नुकसान होगा। भाजपा ने वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अभी से ही तैयारी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार उन राज्यों का दौरा कर रहे हैं, जहा लोकसभा चुनाव से पहले विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश का चुनाव इस वर्ष होने जा रहा है, जबकि राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना, नगालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा तथा मेघालय में अगले वर्ष या लोकसभा चुनाव से पहले विधानसभा चुनाव होंगे। कुल 11 राज्यों में से पांच राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, जबकि दो राज्यों में भाजपा समर्थित सरकारें हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा के समक्ष अपना गढ़ बचाने के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव है। हालांकि क्षेत्रीय राजनीति में वहां के नेताओं की भूमिका होगी। लेकिन प्रधानमंत्री के मैदान में उतरने के बाद सभी राज्यों में मोदी बनाम विपक्ष का मुद्दा बन जाएगा। चुनाव का अंतिम दौर पहुंचते-पहुंचते प्रधानमंत्री की छवि ही भाजपा की छवि बन जाएगी। राजस्थान में कांग्रेस के अशोक गहलोत एवं सचिन पायलट गुट के बीच संग्राम छिड़ा हुआ है। भाजपा इसका फायदा उठाने की पूरी कोशिश करेगी। लेकिन इसके लिए पार्टी को वसुंधरा राजे की असंतुष्ट गतिविधियों पर नियंत्रण करना होगा। छत्तीसगढ़ में अपनी जमीन वापस लेना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि भूपेश बघेल का वहां काफी असर है। मध्यप्रदेश की गद्दी बचाना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए भी अग्नि-परीक्षा के समान है। उनके सामने केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार चुनौती प्रस्तुत कर रहे हैं। तेलंगाना में भाजपा बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पूरा जोर लगा रही है। नीतीश कुमार की तरह तेलंगाना के मुख्यमंत्री चन्द्रशेखर राव भी प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र में भाजपा का प्रदर्शन पहले से भी बेहतर होने की उम्मीद है। अगर 11 राज्यों में भाजपा के प्रदर्शन में सुधार होता है तो इसका फायदा निश्चित रूप से लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उसी चुनौती को ध्यान में रखकर अभी से ही कमर कस चुके हैं। प्रधानमंत्री के साथ-साथ भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार राज्यों के दौरे कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के दौरे के लिए कार्यक्रम भी तय कर लिया गया है। जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के बाद वहां भी चुनाव हो सकते हैं। भाजपा तथा वहां की क्षेत्रीय पार्टियां अपनी तैयारियां शुरू भी कर दी है। वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में मोदी के खिलाफ अभी तक विपक्ष का कोई ऐसा चेहरा सर्वसम्मति से सामने नहीं आया है, जो उनको कड़ी चुनौती दे सके।
भाजपा के समक्ष चुनौती
