प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार पूर्वोत्तर के विकास को अहमियत दे रहे हैं। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही इस दिशा में पहल शुरू हो गई है। मनमोहन सरकार ने पूर्वोत्तर के लिए लुक-ईस्ट पॉलिसी शुरू की थी। मोदी ने सत्ता में आने के बाद इसकी जगह एक्ट-ईस्ट पॉलिसी की शुरूआत कर दी है। इसका फायदा भी पूर्वोत्तर के राज्यों को मिल रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री विकास पहल (पीएम-डिवाइन) नामक नई योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के लिए केंद्र द्वारा शत-प्रतिशत धनराशि उपलब्ध करवाई जाएगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 तक पूरी होने वाली इस योजना के कार्यान्वयन पर 6600 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह योजना केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए है। मोदी सरकार की इस योजना से पूर्वोत्तर के विकास के लिए पहले से चल रही अन्य सामाजिक तथा आर्थिक अवसंरचना विकास योजनाओं को और गति मिलेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे पूर्वोत्तर के राज्यों में रोजगार सृजन के बड़े अवसर पैदा होंगे। इस योजना से शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में काफी काम होगा। इसका कार्यान्वयन पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) करेगा। हाल ही में गुवाहाटी में पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक हुई थी, जिसमें पूर्वोत्तर के विकास के बारे में विस्तार से चर्चा हुई थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गुवाहाटी दौरे के समय बैठक हुई थी। भाजपा पूर्वोत्तर पर लगातार फोकस कर रही है। पार्टी का मानना है कि उत्तर एवं दक्षिणी क्षेत्र के राज्यों में अगर अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा को कम सीट मिलती है तो इसकी भरपाई पूर्वोत्तर क्षेत्र से की जाएगी। वर्तमान में असम, अरुणाचल, त्रिपुरा एवं मणिपुर में भाजपा के मुख्यमंत्री हैं, जबकि नगालैंड, मिजोरम, मेघालय एवं सिक्किम में भाजपा समर्थित सरकारें हैं। भाजपा पूर्वोत्तर में अपनी पैठ मजबूत बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का एक साथ गुवाहाटी दौरा यह दर्शाता है कि पार्टी एवं सरकार पूर्वोत्तर के प्रति कितना गंभीर है। गृह मंत्री ने भी पूर्वोत्तर में मादक द्रव्यों के बढ़ते व्यापार पर चिंता व्यक्त करते हुए इस पर अंकुश लगाने के लिए हरसंभव कदम उठाने का आश्वासन दिया था। पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए पहले ही कई कदम उठाये गए हैं। डोनर मंत्रालय पूर्वोत्तर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए निवेशक सम्मेलन आयोजित करने की योजना बना रहा है। डोनर मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा है कि उनका मंत्रालय जल्द ही दिल्ली में ऐसा आयोजन करेगा। पूर्वोत्तर में पर्यटन, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। इसके लिए पूर्वोत्तर के राज्यों को अपने-अपने क्षेत्र से एक विस्तृत कार्य-योजना सौंपने को कहा गया है। केंद्र सरकार यह जानना चाहती है कि पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए पूर्वोत्तर के राज्यों के पास क्या-क्या योजनाएं हैं? जमीन उपलब्ध करवाने, दूसरी सुविधाएं देने तथा सिंगल विंडोज के द्वारा उनको अनुमति देना आदि शामिल है। निवेश के लिए पूर्वोत्तर के राज्यों में बेहतर माहौल होना भी जरूरी है जो राज्य सरकार की जिम्मेवारी है। आतंकवाद का दौर होने के कारण पहले उद्योगपति पूर्वोत्तर क्षेत्र में पूंजी निवेश करने से कतराते थे। लेकिन अब माहौल पहले से बेहतर हुआ है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए पहल की है। उन्होंने कहा है कि इस दिशा में डोनर मंत्रालय पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों के साथ मिलकर अच्छी पहल कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूर्वोत्तर के विकास के मामले में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। पूर्वोत्तर के कई उग्रवादी संगठनों के राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल होने एवं वार्ता की मेज पर आने के कारण हिंसात्मक गतिविधियों में कमी आई है, जो औद्योगिक वातावरण के लिए अच्छी बात है। शांति का माहौल होने एवं हड़ताल पर अंकुश होने से औद्योगिक विकास की रफ्तार बढ़ेगी जिससे राज्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी एवं रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा होंगे। उम्मीद है कि राष्ट्रपति की वर्तमान यात्रा से और बेहतर माहौल बनेगा। राष्ट्रपति ने भी कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया है।
पूर्वोत्तर पर फोकस
