नई दिल्ली: भारतीय रुपए की हालत दिनोंदिन पतली होती जा रही है। डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में 15 पैसे गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 82.32 पर आ गया है। पिछले सत्र में रुपया 81.88 पर बंद हुआ था। बता दें भारत जरूरी इलेक्ट्रिक सामान और मशीनरी समेत कई दवाओं का भारी मात्रा में आयात करता है। अधिकतर मोबाइल और गैजेट का आयात चीन और अन्य पूर्वी एशिया के शहरों से होता है। अगर रुपए में इसी तरह गिरावट जारी रही तो आयात महंगा हो जाएगा और आपको ज्यादा खर्च करना होगा। भारतीय कंपनियां विदेश से सस्ती दरों पर भारी मात्रा में कर्ज जुटाती हैं। रुपया कमजोर होता है तो भारतीय कंपनियों के लिए विदेश से कर्ज जुटाना महंगा हो जाता है। इससे उनकी लागत बढ़ जाती है जिससे वह कारोबार के विस्तार की योजनाओं को टाल देती हैं। इससे देश में रोजगार के अवसर घट सकते हैं। अमरीका में पढ़ाई कर रहे छात्रों को आवास, कॉलेज फीस, भोजन और परिवहन के लिए डॉलर में खर्च करना होता है।
रसातल में रुपया : आयात से लेकर अमरीका में पढऩा महंगा