राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले चार-पांच दशक में गांधी-नेहरु परिवार के बीच जो विश्वसनीयता बनाई थी, वह अब समाप्त हो गई है। कांग्रेस आलाकमान का उन पर जितना विश्वास था,अब शून्य मात्र भी नहीं है। फिलहाल वे कांग्रेस अध्यक्ष बनने की रेस से भी बाहर हो गए हैं और अब दिग्गी गांधी परिवार की पहली पसंद बन गए हैं। गहलोत के पतन का मुख्य कारण गहलोत का सचिन पायलट से व्यक्तिगत खुन्नस और अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करने की चिंता है। कारण कि गहलोत को डर है कि यदि पायलट मुख्यमंत्री बन गए तो उनका बेटा राजस्थान की राजनीति में स्थापित नहीं हो पाएगा। इसलिए वे राजस्थान का सीएम पद छोडक़र पार्टी का अध्यक्ष पद स्वीकार करना नहीं चाहते थे, जो कांग्रेस आलाकमान को पसंद नहीं है। इसी बीच उनके सहयोगियों ने उनकी खुशी के लिए जो बेवकूफी की, उसका फल उन्हें भोगना ही था और अब वे उसकी टीस मौत के दिन तक अनुभव करते रहेंगे, इसमें कोई शक नहीं है। अब उनका पत्ता कट चुका है। चुनाव में अब दिग्विजय सिंह और शशि थरूर ही शेष बचे हुए हैं। बृहस्पतिवार को दिग्विजय सिंह ने नामांकन का पर्चा लिया और कहा कि वो कल पर्चा दाखिल करेंगे। शशि थरूर के भी कल नामांकन दाखिल करने की तारीख है। इस बीच दोनों नेताओं ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक-दूसरे से गले लगाकर फोटो शेयर किया। कैप्शन में लिखा है- ये प्रतिद्वंद्वियों की नहीं दोस्ताना प्रतियोगिता है। साफ है कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष चुनाव के सहारे विरोधियों को संदेश देना चाह रही है कि जीते कोई भी लक्ष्य कांग्रेस को मजबूत करना है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल से सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा की जिसमें वो और दिग्विजय सिंह को एक-दूसरे को गले लगाते हुए देखा जा सकता है और पोस्ट किया गया कि यह प्रतिद्वंद्वियों के बीच नहीं बल्कि सहयोगियों के बीच एक दोस्ताना प्रतियोगिता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आम लक्ष्य कांग्रेस को जीत दिलाना है। पोस्ट को रीट्वीट करते हुए, दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह थरूर से सहमत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी लड़ाई सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ है और वे दोनों गांधीवादी-नेहरूवादी विचारधारा में विश्वास करते हैं। उन्होंने थरूर को आगामी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं। दरअसल, राजस्थान में कांग्रेसी विधायकों के विद्रोह के बाद सीएम अशोक गहलोत ने कांग्रेस आलाकमान के सामने विश्वास खो दिया है। अशोक गहलोत ने बृहस्पतिवार को सोनिया गांधी से मुलाकात की और कहा कि पहले वो कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लडऩे की सोच रहे थे लेकिन, राजस्थान में हुई घटना के बाद से वो आहत हैं और अब वे चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे। अशोक गहलोत सिर्फ कांग्रेस अध्यक्ष की रेस से ही बाहर नहीं हुए हैं, बल्कि राजस्थान में सीएम पद पर संशय बना हुआ है। जिस तरह राजस्थान में राजनीतिक घटनाक्रम हुआ। उससे कांग्रेस हाई कमान को संदेश मिला है कि गहलोत के पास विधायकों की पकड़ उतनी मजबूत नहीं रही। अशोक गहलोत ने भी प्रेस कांफ्रेस में सीएम पद को लेकर कहा कि वो सीएम बने रहेंगे या नहीं इसका फैसला सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष करेंगे। अशोक गहलोत के साइड होते ही कांग्रेस अध्यक्ष रेस में शशि थरूर और दिग्विजय सिंह ही हैं। दिग्विजय सिंह अचानक लाइमलाइट में आए हैं। माना जा रहा है कि राजस्थान में हुए घटनाक्रम के बाद हाईकमान के मन में गहलोत के प्रति अविश्वास पैदा हुआ जिसमें दिग्विजय सिंह का नाम सामने आया। सिंह प्रियंका गांधी के करीबी माने जाते हैं और वो सोनिया गांधी-राहुल गांधी के विश्वासपात्र माने जाते हैं। शशि थरूर भी कांग्रेस हाईकमान के भरोसेमंद हैं। हालांकि जी-23 समूह का हिस्सा होने के कारण उनके कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव जीतने के चांसेज कम हैं। फिर भी अभी यह कहना मुश्किल है कि कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी किसके हाथ लगती है। गांधी परिवार जिसे पसंद करेगा वो ही उस पद पर आसीन होगा। हालांकि खुले तौर पर राहुल और सोनिया ने किसी का समर्थन करने से परहेज किया है।
दिग्गी बनाम थरूर
