इस वर्ष के अंतिम महीने में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव पर सिर्फ भारत की ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजर है। इसकी वजह साफ है। गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य है जहां वे लगातार डेढ़ दशक से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। दूसरी ओर उन्होंने वहां के विकास के लिए काफी काम किए। 2014 में जब वे भाजपा की ओर से पीएम पद के उम्मीदवार बने तो पूरे देश के सामने विकास का गुजरात मॉडल पेश किया और भारी बहुमत के साथ चुनाव जीतकर भारत के प्रधानमंत्री बने। वास्तव में देखा जाए तो यदि गोधरा कांड को नजरअंदाज कर दिया जाए तो मोदी गुजरात के निर्विवाद मुख्यमंत्री रहे,जो उन्हें प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचाया और 2024 में वे लोकसभा चुनाव जीत गए तो लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनेंगे,जो अपने आप में एक इतिहास होगा, परंतु फिलहाल गुजरात में भाजपा उतनी मजबूत नहीं दिख रही है,जितनी मोदी के मुख्यमंत्री काल में थी। इस बार के चुनाव में भाजपा को आम आदमी पार्टी (आप) से कड़ी टक्कर मिलने वाली है। आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने वहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस कारण केजरीवाल को दिल्ली की सरकार चलाने में केंद्र सरकार की ओर से कथित परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है,उसके स्वास्थ्यमंत्री जेल में बंद हैं तो दूसरी ओर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर कुछ दिनों पहले तक गिरफ्तारी की तलवारें लटक रही थीं, फिर भी वहां आप की सरकार अच्छे ढंग से चल रही है। इन दिनों गुजरात के गांवों से लेकर शहरों तक सरगर्मियां काफी बढ़ गई हैं और यह नवरात्रि के कारण नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए पारा धीरे-धीरे चढऩे के बीच राज्य में एक पूर्व पत्रकार, एक सामाजिक कार्यकर्ता और एक पूर्व कांग्रेसी विधायक ने भारतीय जनता पार्टी को उसके अपने ही गढ़ में घेरने के लिए कमर कस ली है। ये तीनों ही आम आदमी पार्टी के नए चेहरे हैं जो यहां स्थानीय स्तर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ पोस्टर बॉय वाली इमेज साझा करते हैं। आप के सभी बड़े नेता चुनावी तैयारियों में जुटे हैं और राज्य भर के दौरे पर हैं। यह साबित करता है कि गुजरात में केजरीवाल वन मैन आर्मी नहीं हैं। पिछले कुछ हफ्तों में गुजरात आप के अध्यक्ष गोपाल इटालिया, इसुदान गढ़वी और इंद्रनील राजगुरु ने अपना चुनावी अभियान तेज कर दिया है। वे पूरे राज्य की यात्रा कर रहे हैं और मतदाताओं से उन्हें और उनकी पार्टी को एक मौका देने को कह रहे हैं। 32 वर्षीय इटालिया पिछले सात सालों से एक एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय हैं और जमीनी स्थिति, खासकर ग्रामीण भारत की खासी समझ रखते हैं। गढ़वी,एक पूर्व पत्रकार और वीटीवी गुजराती के संपादक हैं, जिन्होंने काफी लोकप्रिय कार्यक्रम महामंथन की एंकरिंग की थी, जिसके बड़ी संख्या में प्रशंसक हैं, वहीं कांग्रेस के प्रमुख नेता रहे राजगुरु इसी साल अप्रैल में अपनी निष्ठा बदलकर आप का हिस्सा बन गए थे। लाखों लोगों के बीच उनका एक मजबूत जनाधार है, लेकिन तीनों के बीच केवल राजगुरु के पास ही राजनीतिक अनुभव है। भाजपा मानती है कि राजनीतिक स्टंट करके कोई भी फेमस हो सकता है, लेकिन लोग उन पर भरोसा करेंगे, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। गढ़वी, इटालिया, राजगुरु, और आप का नया चेहरा बने अन्य सभी लोग भाजपा को घेरने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। ये केजरीवाल के ही नक्शेकदम पर चल रहे हैं जो कभी खुद भी राजनीति में न्यूकमर थे। आप की योजना गुजरात में हर दरवाजे पर दस्तक देने और उम्मीद और बदलाव की कोशिशों का अपना संदेश पहुंचाने की है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि हम सभी को यह बताना चाहते हैं कि हमने दिल्ली और पंजाब में क्या किया है। गुजरात जैसे राज्य में किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कोई भाजपा के खिलाफ लड़ेगा। लेकिन अब लोग हम पर भरोसा जता रहे हैं। अब देखना है कि चुनाव के बाद नतीजे क्या आते हैं, जो फिलहाल भविष्य के गर्भ में हैं।
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