नई दिल्ली: सरकार हमेशा आयकर रिटर्न समय पर भरने को कहती है। इसका मकसद आयकरदाताओं को रिफंड में देरी समेत कई तरह की परेशानी से बचाना होता है। इस साल आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने की समय अंतिम समय सीमा समाप्त हुए 49 दिन हो गए हैं। हालांकि, कुछ ऐसे करदाता हैं, जिन्होंने अंतिम समय से पहले ही रिटर्न भर दिया। इसके बावजूद अभी तक उनका आईटीआर रिफंड नहीं मिला है। टैक्स सलाहकारों का कहना है कि आईटीआर रिफंड में देरी कई कारणों से हो सकती है। आयकर विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर रिफंड की स्थिति की जांच की जा सकती है। आईटीआर रिफंड में देरी कई कारणों से हो सकती है। आईटीआर रिफंड में देरी का एक कारण बैंक खाता का सत्यापन भी हो सकता है। करदाता ई-फाइलिंग पोर्टल में लॉग इन करके बैंक खाते को सत्यापित करने में त्रुटि की जांच कर सकते हैं। इसमें करदाता इस बात का पता लगा सकते हैं कि उनका बैंक खाता पैन से संबंधित है या नहीं। टैक्स सलाहकारों का कहना है कि यदि करदाताओं की पिछले वित्तीय वर्ष से बकाया लंबित है तो इस स्थिति में भी रिफंड में देरी हो सकती है। टैक्स सलाहकार के.सी.गोदुका का कहना है कि ऐसी स्थिति में आयकर विभाग इस मामले में उस डिमांड के खिलाफ रिफंड राशि को समायोजित करेगा। हालांकि, आयकरदता को इसकी जांच जरूर करनी चाहिए। गोदुका का कहना है कि आईटीआर रिफंड में देरी की एक और वजह हो सकती है। उनका कहना है कि यदि रिफंड की राशि 100 रुपए से कम है, तो आयकर विभाग इसे आपके बैंक खाते में जमा नहीं करता है। ऐसे मामलों में राशि को भविष्य के आयकर रिफंड के खिलाफ समायोजित किया जाता है। आयकर रिफंड की प्रक्रिया तभी शुरू होती है जब विभाग की ओर आईटीआर को संसाधित यानी उसे आगे के लिए बढ़ा दिया गया हो। साथ ही आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी पुष्टि की हो गई हो।
करदाताओं ने तय तारीख से पहले भरा आईटीआर, फिर भी नहीं मिला रिफंड