असम में एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनने जा रही है। दिसपुर में सरकार गठन के लिए जादुई आंकड़ा प्राप्त होने के बाद अब पहला अध्याय समाप्त हो चुका है। अब दूसरा अध्याय शुरू होने वाला है। किसके  नेतृत्व में दिसपुर में अगली सरकार बनेगी। सर्वानंद सोनोवाल अगर मुख्यमंत्री बनते हैं तो क्या मंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा को उप मुख्यमंत्री  का प्रभार मिल सकता है? या उन पर पहले जैसा अधिक महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व थोपकर वर्तमान की तरह मंत्री बनाकर ही रखा जाएगा या उन दोनों में से किसी एक को दिल्ली भी बुलाया जा सकता है। क्या मंत्री डॉ. शर्मा नेतृत्व का बागडोर संभालेंगे? इसे केंद्र बनाकर राजनीतिक हलकों में अटकलें शुरू हो गई हैं। ऊपरी असम में मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल तथा मंत्री डॉ.शर्मा दोनों ने मिलकर व्यापक चुनाव प्रचार चलाया था। इसका परिणाम पार्टी को मिल भी चुका है। हालांकि अबकी बार दादा ब्रिगेड के अधिकांश प्रत्याशियों को जीत हासिल करने में कामयाबी मिली है। चुनावी परिणाम में दादा ब्रिगेड के अन्यतम पीयूष हजारिका, जयंत मल्ल बरुवा, मानव डेका, तरंग गोगोई, हेमांग ठाकुरिया, दिगंत कलिता व जितू गोस्वामी जैसे कई नेता विधानसभा में निर्वाचित हो चुके हैं। पिछली बार भाजपा सरकार का मुख्य नारा था-परिवर्तन। किंतु अबकी बार असमवासियों ने परिवर्तन न चाहकर भाजपा को फिर सत्ता पर काबिज किया। असमवासियों के ऐसे फैसले से पार्टी मुख्यालय वाजपेयी भवन बेहद खुश है। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 93 क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था। पार्टी के घटक दल अगप ने 26 तथा यूपीपीएल ने 9 क्षेत्रों में अपना उम्मीदवार उतारा। समाचार लिखे जाने तक भाजपा को 59, अगप को  नौ तथा यूपीपीएल को छह विस क्षेत्रों में जीत हासिल हुई। दूसरी ओर कांग्रेस नेतृत्वाधीन महागठबंधन के घटक कांग्रेस ने  94, बीपीएफ ने 12, एआईयूडीएफ ने 19, वाम दलों ने चार तथा आरडेजी ने एक व आंचलिक गण मोर्चा ने दो विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ा। समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस ने 30 एआईयूडीएफ को 16,बीपीएफ  ने चार और सीपीएम को एक सीट हासिल की।साथ एक सीट पर राइजर दल के प्रमुख अखिल गोगोई की जीत हुई है। हालांकि महागठबंधन के घटक दल आरजेडी तथा आंचलिक गण मोर्चा को एक भी सीट नहीं मिली। 126 सीटों वाले असम विधानसभा चुनाव में सरकार गठन के लिए 64 सीटों की जरूरत है। भाजपा गठबंधन ने इस जादुई अंक को हासिल कर लिया है। तीन चरणों में हुए असम विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती रविवार सुबह आठ बजे से शुरू हुई। उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून (का) की खिलाफत करते हुए असम विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में कई नए आंचलिक दलों का गठन किया गया था। किंतु अबकी बार के चुनाव में राज्यवासियों ने इन नए दलों पर विश्वास नहीं जताया। सांसद अजीत भुइयां नेतृत्वाधीन आंचलिक गण मोर्चा तथा लुरिन ज्योति नेतृत्वाधीन असम जातीय परिषद का खाता भी नहीं खुल सका। इसके विपरीत राइजर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने जेल से ही शिवसागर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत कर पार्टी की इज्जत बचाई। राइजर दल के शेष सभी प्रत्याशी चुनाव हार गए। दूसरी ओर असम जातीय परिषद के अध्यक्ष लुरिन ज्योति गोगोई दुलियाजान व नाहरकटिया दोनों क्षेत्रों से चुनाव हार गए। उधर असम जातीय परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष पवींद्र कुमार डेका ने पाटाचारकुची विधानसभा क्षेत्र से तथा दल के महासचिव जगदीश भुइयां ने सदिया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। ये दोनों नेता भी चुुनाव हार गए हैं। वहीं आंचलिक गण मोर्चा नामक नए दल ने दो क्षेत्रों से कांग्रेस महागठबंधन से मिलकर चुनाव लड़ा था किंतु दोनों प्रत्याशियों को चुनाव में मुंह की खानी पड़ी। आंचलिक गण मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष मनजीत महंत ने दिसपुर क्षेत्र से तथा प्रणब दलै ने बोकाखात क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। चुनाव में महंत दिसपुर क्षेत्र से भाजपा के अतुल बोरा तथा दलै बोकाखात क्षेत्र से अगप के अध्यक्ष अतुल बोरा के हाथों बड़े मतों के अंतर से चुनाव हार गए।