असम में कोरोना तेजी से फैल रहा है तथा भयंकर रूप धारण कर चुका है। हालांकि आईसीएमआर ने 18 फरवरी को ही असम सरकार को सावधान करते हुए एक पत्र लिखकर कहा था कि राज्य में कोरोना का यूके वेरिएंट पहुंच चुका है, लेकिन राज्य सरकार ने चुनाव प्रचार के चक्कर में आईसीएमआर के दिशा-निर्देश को दरकिनार कर दिया था। अब प्रश्न उठता है कि जनता की जान जोखिम में डालने के लिए कौन जिम्मेदार है? राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने कहा है कि राज्य में 9 अप्रैल से कोरोना संक्रमण ने रफ्तार पकड़ना शुरू किया है। स्वास्थ्य विभाग 6 अप्रैल को हुए अंतिम चरण के मतदान तथा बिहू समारोह के बाद ही हरकत में आया है। अगर राज्य सरकार पहले से ही सावधानी बरती होती तो राज्य में कोरोना कतई विकराल रूप धारण नहीं करता। कोरोना के फैलने के लिए सभी राजनीतिक दल जिम्मेदार हैं, चाहे भाजपा हो या कांग्रेस या अगप या अन्य राजनीतिक दल। क्या राजनेताओं को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए आम जनता को जोखिम में डालना सही है? अगर आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि 14 अप्रैल को राज्य में कोरोना संक्रमण के 385 मामले सामने आए, जिसमें 201 मामले कामरूप (मेट्रो) जिले से थे। उस वक्त संक्रमण की दर 1.28 प्रतिशत थी। लेकिन 18 अप्रैल से कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेज हो गई। 18 अप्रैल को राज्य में कुल संक्रमण 639 हो गए, जिसमें कामरूप (मेट्रो) का योगदान 354 हो गया था। संक्रमण दर बढ़कर पर 2.74 तक पहुंच गई। 19 अप्रैल को राज्य में संक्रमितों की संख्या 1367, 20 अप्रैल को 1651, 21 अप्रैल को 1665, 22 अप्रैल को 1931, 23 अप्रैल को 2384 तथा 24 अप्रैल को घटकर 2236 पर पहुंची। शनिवार को कामरूप (मेट्रो) जिले में नए संक्रमितों की संख्या 815 तक हो गई है। अब स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि अगर गुवाहाटी में संक्रमितों की संख्या 1000 तक पहुंची तो स्कूल-कॉलेज और हॉस्टल बंद करने होंगे तथा कठोर कदम उठाना होगा। स्थिति गंभीर होने के बाद सर्वदलीय बैठक आयोजित करने की भी जरुरत महसूस हुई है। सभी पार्टियों ने निर्णय लिया है कि 2 मई को मतगणना के बाद कोई भी पार्टी विजय उत्सव नहीं मनाएगी। अगर चुनाव प्रचार के वक्त सावधानी बरती गई होती तो शायद ऐसी स्थिति नहीं होती। देश के अन्य राज्यों की तरह असम में यूके वेरिएंट का लक्षण पाया जाना खतरे की घंटी है। अब लोगों को ज्यादा सावधान रहने तथा कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की जरुरत है। ऊपरी असम के डिब्रूगढ़, तिनसुकिया तथा जोरहाट में पहले से ही कोरोना संक्रमण शुरू हो गया था। यूके वेरिएंट पहले से 30 से 80 प्रतिशत तक ज्यादा खतरनाक है। अभी असम संक्रमण के भयानक दौर से गुजर रहा है। जबकि अभी कुछ राजनेता सोनापुर के दिसांग रिजॉर्ट में जलक्रीड़ा का आनंद ले रहे हैं। अब तो संक्रमण की दर के दृष्टिकोण से असम तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय, कॉटन कॉलेज तथा कई स्कूल संक्रमण की गिरफ्त में आ चुके हैं। डिब्रूगढ़ में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या एक हजार से पार हो गई है। प्रधानमंत्री 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ शुक्रवार को हुई वर्चुअल बैठक में एक राष्ट्र बनकर काम करने की अपील कर रहे हैं, फिर भी इस संकट काल में राजनीति जारी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट तथा हाई कोर्ट को हस्तक्षेप के लिए मैदान में उतरना पड़ा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 15 मई तक देश में कोरोना संक्रमण पीक पर होगा। ऐसी स्थिति में राज्य सरकारों तथा जनता को सावधान रहना होगा। सरकार को सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन तथा कोरोना से संबंधित दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। कोरोना के खिलाफ जंग सबको मिलकर लड़ना होगा।