राष्ट्रीय जनता दल सहित सात विपक्षी पार्टियों के गठबंधन से बिहार के दोबारा मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार के शासन में अपराधियों का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। प्रशासन ऐसे अपराधियों पर अंकुश लगाने में अब तक नाकाम रही है। 13 सितंबर को बेगुसराय जिले में बाइक पर आए दो युवकों ने 50 राउंड अंधाधुंध फायरिंग की जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई एवं 11 से ज्यादा लोग घायल हो गए। अपराधियों ने फायरिंग करते  हुए लगभग 30 किलोमीटर की दूरी तय की जिसके तहत छह पुलिस थाने क्षेत्र आते हैं। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि अभी तक न तो हत्यारे की पहचान हुई हैं और न किसी को गिरफ्तार किया जा सका है। राजधानी पटना में भी आज एक अपहरण की घटना हुई है। ऐसा लगता है कि राजद के साथ गठबंधन करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशासन से पकड़ ढीली हो गई है। पिछले 17 अगस्त को एक पुजारी की हत्या कर दी गई, जबकि 18 अगस्त को एक पत्रकार की हत्या कर दी गई। पटना के एक शोरूम में गार्ड को गोली मारकर 9 लाख रुपए की लूट हुई थी। इसके अलावा एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने का मामला भी सामने आ चुका है। इसके अलावा कई अन्य आपराधिक घटनाएं हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया जा  चुका है। साथ ही उन्होंने इस घटना को राजनीतिक रंग देते हुए कहा है कि जिस क्षेत्र में फायरिंग हुई है वह इलाका अतिपिछड़ी जातियों का है। अपराध तो अपराध ही होता है। उसको जातीय एवं सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है। जब राज्य के मंत्री भी मुख्यमंत्री की बात नहीं मान रहे हैं तो इसका प्रभाव प्रशासन पर निश्चित रूप से पड़ेगा। मालूम हो कि राज्य के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने अपने को चोरों का सरदार बताया था तो मुख्यमंत्री ने उनके इस बयान आपत्ति जताई थी। उसके बाद सुधाकर सिंह ने स्पष्ट कर दिया था कि वो अपने बयान से पीछे नहीं हटेंगे। वे केवल राष्ट्रीय जनता दल एवं लालू यादव के वफादार हैं।  जहां इस तरह की स्थिति है वहां प्रशासन क्या कर सकता है? यह सबको मालूम है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं, किंतु प्रशासन पर असली पकड़  लालू यादव एवं तेजस्वी यादव की है। भाजपा बढ़ते अपराध के मुद्दे को  लेकर नीतीश सरकार पर काफी हमलावर है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि बिहार में फिर से जंगलराज-2 शुरू हो गया है। ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विवश नजर आ रहे हैं। उन्होंने बिहार के एक कार्यक्रम में कहा है कि अगर विपक्ष केंद्र की सत्ता में आती है तो सभी पिछड़े राज्यों को विशेष दर्जा दिया जाएगा। उनसे तो अभी बिहार की स्थिति सुधर नहीं रही है, दूसरे वे अन्य पिछड़े राज्यों को तोहफा देने की बात कर रहे हैं। उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपराध को नियंत्रित करने की जगह यह तर्क देने में लगे हैं कि बेगुसराय की घटना को अलग दिशा देने की कोशिश हो रही है। सरकार का दायित्व है कि वह बढ़ते अपराध को रोकने एवं हो रही साजिश को पर्दाफाश करने के लिए कदम उठाए। केवल आरोप-प्रत्यारोप लगाने से काम नहीं चलेगा। अगर नीतीश कुमार को अपने को प्रधानमंत्री पद के लिए पेश करना है तो उन्हें बिहार में पहले सुशासन कायम करना होगा।