पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कमी और कीमतों के चलते पूरी दुनिया का फोकस इस समय इलेक्टि्रक वाहनों पर है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री इसी प्रयास में लगी हुई है कि इलेक्टि्रक वाहन पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों के मुकाबले ज्यादा किफायती और सक्षम हो हालांकि अभी तक ऐसा नहीं हो पाया है और हमें कई तरह की दिक्कतों जैसे बहुत धीमी स्पीड, कम ओवरलोड़ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
फास्ट चार्जिंग स्टेशन्स का नेटवर्क बनाना होगा जरूरीः हाल ही में हुई एक स्टडी में पाया गया कि यदि पूरे देश में फास्ट चार्जिंग स्टेशन्स का नेटवर्क बनाया जा सके तो इस समस्या का कुछ समाधान हो सकता है। यदि हम ऐसा कर सके तो इलेक्टि्रक वाहन भी पेट्रोल-डीजल वाहनों को टक्कर दे सकेंगे। इस समय टेस्ला तथा अन्य कई कार निर्माता कंपनियां ज्यादा पावरफुल इलेक्टि्रक वाहन बनाने के प्रयासों में लगी हुई हैं और वो कुछ हद तक कामयाब भी हो रही हैं लेकिन डीजल व्हीकल्स की तुलना में वो बहुत ज्यादा महंगी हैं जिस वजह से आम यूजर उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। स्टॉकहोम एनवायर्नमेंट इंस्टीट्यूट की रिसर्च के अनुसार इस समस्या का सबसे सही हल यही है कि बैटरियां ज्यादा एफिशिएंट हो और पूरे देश में इलेक्टि्रक व्हीकल्स को फास्ट रिचार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन्स का नेटवर्क बनाया जाए। यदि हम ऐसा कर पाए तो इलेक्टि्रक वाहन न केवल ज्यादा स्पीड और एफिशिएंसी के साथ काम कर पाएंगे वरन डीजल वाहनों की जरूरत भी बहुत हद तक खत्म हो जाएगी।
वर्तमान में मेट्रो और ट्रेन चलती है इलेक्टि्रसिटी सेः इस समय लगभग पूरी दुनिया की मेट्रो सर्विसेज डीजल के बजाय इलेक्टि्रसिटी से चल रही है और न केवल आम ट्रेनों की तुलना में ज्यादा स्पीड से चलती हैं। इन इलेक्टि्रक ट्रेन्स और मेट्रो की परफॉर्मेंस देख कर ही वैज्ञानिक पावर एफिशिएंट हैवी व्हीकल्स बनाने की कोशिशें कर रहे हैं जो डीजल और पेट्रोल व्हीकल्स को टक्कर दे सकें।