आखिरकार पूर्व विदेश मंत्री लिज ट्रस ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के रूप में बागडोर संभाल ली हैं। कड़े मुकाबले में ट्रस ने पूर्व वित्त मंत्री एवं भारतीय मूल के नेता ऋषि सुनक को मात दी है। हालांकि पहले राउंड में सुनक ट्रस से आगे चल रहे थे। कंजरवेटिव पार्टी के सबसे ज्यादा सांसदों ने सुनक को समर्थन दिया था, लेकिन कंजरवेटिव पार्टी के सदस्यों द्वारा किए गए मतदान में सुनक पीछे रह गए। मालूम हो कि पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के कई मंत्रियों द्वारा इस्तीफा देने के बाद ब्रिटेन में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था। उसके बाद से ही नए प्रधानमंत्री की खोज शुरू हो गई थी। ट्रस बोरिस जॉनसन के अलावा डेविड कैमरन, टेरेसा मे के मंत्रिमंडल में काम कर चुकी हैं। उनके सामने उच्च मुद्रा स्फीति तथा ऊर्जा की कीमतों में भारी वृद्धि दो बड़ी समस्याएं हैं, जिनका हल उन्हें खोजना पड़ेगा। ब्रिटेन अभी आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहा है। नए प्रधानमंत्री को इस समस्या से निबटने के लिए काम करना होगा, जो आसान नहीं है। उन्होंने करों में कटौती, यूरोपीय संघ के कानूनों से छुटकारा पाने, राष्ट्रीय बीमा वृद्धि को उलटने और हरित ऊर्जा की लेवी पर रोक लगाने का वादा किया था। ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि मुद्रा स्फीति में सबसे बड़ा योगदान करता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोपीय देशों में ईंधन एवं  की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो रही है। यूक्रेन को समर्थन देने वाले देशों को रूस गैस की आपूर्ति में कटौती कर रहा है। गैस की आपूर्ति में कमी के कारण जुलाई में मुद्रा स्फीति बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई है जो पिछले वर्ष जुलाई की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। खाद्य सामग्रियों की कीमतों में भी काफी वृद्धि हुई है, जिसको नियंत्रित करना ट्रस के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। इंग्लैंड की खराब अर्थ-व्यवस्था के पीछे केवल उच्च मुद्रा स्फीति ही नहीं है, बल्कि कोविड लॉकडाउन तथा यूक्रेन में चल रहे युद्ध भी बड़ा कारक है। ब्याज दरों में बेतहाशा वृद्धि के कारण ब्रिटेन आर्थिक मंदी के दौर में प्रवेश कर सकता है। इसलिए नई सरकार के सामने मुद्रा स्फीति को स्थिर करने का दबाव है। ट्रेड यूनियनों के प्रति नए पीएम नकारात्मक रुख से उनकी सरकार के लिए जनता का समर्थन और कम हो सकता है। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रस ने जनता से जो वादे किये हैं उस पर खड़ा उतरना होगा। आंतरिक चुनौतियों के साथ-साथ वैश्विक चुनौतियां भी नई सरकार के सामने होगी। ट्रस ने भारतीय समुदाय को संतुष्ट करने के लिए सुएला ब्रेवरमैन को ब्रिटेन का गृह मंत्री नियुक्त किया है। ब्रेवरमैन भारतीय मूल की महिला हैं, जिन्हें बड़ी जिम्मेवारी सौंपी गई है। इससे पहले जॉनसन मंत्रिमंडल में भारतीय मूल की महिला प्रीति पटेल को गृह मंत्री बनाया गया था। ब्रिटेन की नई सरकार भी भारत के प्रति उदारवादी नीति अपनाएगी। पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भारत के संबंध सुधारने के लिए कई कदम उठाए थे। जॉनसन की विश्वास पात्र ट्रस भी उसी नीतियों पर चलने की कोशिश करेंगी। ब्रिटेन भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता लागू करने के लिए प्रयासरत है। इस साल के अंत तक इस पर सहमति बनने की उम्मीद है। यूरोपीय यूनियन से अलग होने के बाद ब्रिटेन अपने व्यापार को दूसरे देशों के साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागिरी के खिलाफ ब्रिटेन भी अमरीका के साथ मिलकर चीन को घेरने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहा है। अमरीका, ब्रिटेन तथा आस्ट्रेलिया ने मिलकर एक नया सामरिक संगठन भी बनाया है, जो चीन की चुनौतियों के मुकाबले के लिए मिलकर काम कर रहा है। क्वाड पहले ही चीन के खिलाफ सक्रिय है। ब्रिटेन भी चीन को घेरने के लिए अपनी तरफ से हरसंभव सहयोग दे रहा है। रूस-यूक्रेन के दौरान ब्रिटेन ने यूक्रेन को गोला-बारूद की आपूर्ति की है। नए प्रधानमंत्री के सामने आगे कई तरह समस्याएं आने वाली है। जिसका हल उन्हें निकालना होगा।