तेजपुरः घोड़ामारी आश्रम परिसर में विहंगम योग संस्थान का दो दिवसीय संत समागम विश्व शांति वैदिक महायज्ञ के द्वारा संपन्न हुआ। मालूम हो कि विश्व के कल्याण, विश्व की शांति एवं सभी में परस्पर सौहार्द के लिए वैदिक मंत्रोच्चार के द्वारा यज्ञ में आहुतियां प्रदान की गईं और ईश्वर से सभी के कल्याण की कामनाएं की गईं। यज्ञ से पहले यौैगिक क्रियाओं द्वारा अशांत मन को कैसे शांत किया जाए कैसे स्थिर किया जाए, मानसिक तनाव को कैसे दूर किया जाए इसके लिए योग साधना अभ्यास संत प्रवर विज्ञान देव महाराज ने कराया, जिस तरह तालाब के पानी में जब तक तरंग है प्रतिबिंब दिखलाई नहीं पड़ता उसी तरह जब तक हमारा मन चंचल है हमें अपने स्वरूप का ज्ञान नहीं होता। मालूम हो कि सर्वप्रथम ध्यान साधना द्वारा आत्मिक शक्तियों को एक स्थान पर एकत्रित कर मन को नियंत्रित कर शांत किया जाता है और अपने स्वरूप का बोध प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर हो मन को अंतर्मुख कर मन को उसके मंडल में लय किया जाता है, तदुपरांत हमें अपने स्वरूप का ज्ञान होता है कि मैं शरीर नहीं हूं मैं आत्मा हूं और इस संसार सागर से मुझे मुक्त होना है आवागमन से मुक्त होना ही मेरा एकमात्र लक्ष्य है और सद्गुरु ही वह सत्ता है जो मुझे आवागमन से मुक्त करा सकती है हमारे जीवन में सद्गुरु की आवश्यकता क्यों है सद्गुरु क्या है सद्गुरु की शक्तियों का परिचय हमें कैसे होता है इन सभी गहन विषय पर संत प्रवर विज्ञान देव महाराज ने अपनी दिव्य वाणी से संबोधित किया। वहीं वंदना आरती एवं शांति पाठ से संत समागम का समापन हुआ। उल्लेखनीय है कि विशेष तौर पर आज के कार्यक्रम में राष्ट्रीय संत किशन शर्मा, पूर्वांचल विहंगम योग संस्थान के अध्यक्ष मदन मोहन सिंह, महामंत्री मालीराम अग्रवाल, मंत्री योगेंद्र गुप्ता, गुवाहाटी विहंगम योग संस्थान के अध्यक्ष किशन लाल प्रजापति, राजस्थान विहंगम योग संस्थान के अध्यक्ष सावरमल जोशी, अमी लाल अग्रवाल, जेके पांडे, नथमल टेबड़ी वाल, दिलीप शर्मा, महेंद्र प्रजापति, अरुण सिंघल, मनोज प्रजापत, विकास मोहन सिंह, विजय छेत्री तथा लोक बहादुर छेत्री आदि उपस्थित थे।