बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा कूटनीतिक एवं सामरिक दोनों ही दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। हसीना की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हुई बैठक में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें जल, आतंकवाद, सीमा प्रबंधन, सुरक्षा सहयोग एवं सीमावर्ती  अपराध शामिल हैं। इसके अलावा रेलवे, विज्ञान प्रौद्योगिकी तथा रोहिंग्या शरणार्थी के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मोदी के साथ हुई बैठक से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के साथ कई मुद्दों पर चर्चा की। भारत ने बांग्लादेश को स्पष्ट रूप से संदेश दे दिया है कि वह आघात करने वाली शक्तियों से सावधान रहें। इसका अर्थ बिल्कुल स्पष्ट है कि भारत नहीं चाहता है कि बांग्लादेश चीन और पाकिस्तान की साजिश का शिकार बने। चीन बांग्लादेश, नेपाल एवं श्रीलंका के साथ संबंध बढ़ाकर भारत को घेरने की कोशिश में लगा हुआ है। यह सबको मालूम है कि वर्तमान समय में भारत और चीन के संबंध सामान्य नहीं हैं। विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने बयान में स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सीमा पर तनाव खत्म नहीं होता, तब तक भारत और चीन के बीच संबंध सामान्य नहीं हो सकते। चीन बांग्लादेश को अपने कर्जजाल में फंसाकर भारत के खिलाफ करना चाहता है। श्रीलंका की तरह बांग्लादेश को भी अब एहसास होने लगा है कि अगर वह चीन की तरफ झुकता गया तो उसकी आर्थिक स्थिति और बदतर होती जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्विपक्षीय बैठक के बाद कहा है कि बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा विकास साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार 9 अरब डॉलर से बढ़कर 18 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। दो-तीन वर्ष के बाद यह आंकड़ा 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। मोदी ने यह भी कहा कि 1971 में हुए मुक्ति आंदोलन की भावना को जागृत कर दोनों देशों को आगे बढ़ने की जरूरत है। मालूम हो कि उस मुक्ति आंदोलन में भारत ने बांग्लादेश को आजाद कराने के लिए अपने हजारों सैनिकों की शहादत दी थी। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने भी आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर लोगों को बधाई दी है तथा अमृतकाल के लिए शुभकामनाएं भी दीं। मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से यह घोषणा की थी कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लाया जाएगा। इस समय को उन्होंने अमृतकाल का नाम दिया है। हालांकि द्विपक्षीय बैठक के दौरान तीस्ता नदी के बारे में कोई सहमति नहीं बन सकी, किंतु कुशियारा नदी जल समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। इस समझौते से दक्षिणी असम एवं बांग्लादेश के सिलहट क्षेत्र के लोगों को लाभ पहुंचेगा। दोनों देशों की सीमावर्ती क्षेत्र से कुल 54 नदियां गुजरती हैं, जिससे दोनों देशों का हित जुड़ा हुआ है। ब्रह्मपुत्र नद भी चीन से शुरू होकर भारत होते हुए बांग्लादेश तक पहुंचता है। भारत हमेशा से बांग्लादेश को भरोसेमंद पड़ोसी समझकर मदद करता आया है, लेकिन बांग्लादेश को भी भारत के राष्ट्रीय हितों को समझना होगा। उसे चीन का मोहरा बनने की बजाय अपने को अच्छा पड़ोसी साबित करना होगा। चीन चटगांव बंदरगाह को विकसित करने के नाम पर भारी कर्ज देकर कब्जाना चाहता है, ताकि वह भारत के खिलाफ इसका इस्तेमाल कर सके। बांग्लादेश की धरती से भारत में आतंकियों एवं कट्टरपंथियों द्वारा मुहिम चलाया जा रहा है। बांग्लादेश के कट्टरपंथियों द्वारा वहां रहने वाले हिंदू समुदाय के  लोगों पर हमले किए  जा रहे हैं एवं उनके धर्म स्थलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। शेख हसीना अगर भारत के साथ घनिष्ठ संबंध बनाना चाहती हैं तो उन्हें ऐसी शक्तियों पर नकेल कसना होगा। बैठक के दौरान यह मुद्दा निश्चित रूप से उठा होगा। उम्मीद है कि हसीना की वर्तमान यात्रा से दोनों देशों के संबंध और प्रगाढ़ होंगे।