बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नाता तोडऩे के बाद फिर से सुर्खियों में हैं। कुछ लोग तो उन्हें 2024 के आम चुनाव में विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बता रहे हैं। वे प्रधानमंत्री बनने की आकांक्षा रखने वाले नेताओं में से एक हैं। ऐसे नेताओं की लिस्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव के अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी शामिल हैं। दूसरी ओर जद(यू) का कहना है कि यदि देश में शख्सियतों का आकलन करें तो नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनने के योग्य हैं। यदि आज पटना में समाप्त जद(यू) कार्यकारिणी की बैठक, नीतीश और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यन ललन सिंह और पटना में जगह-जगह लगाए पोस्टरों में लिखे गए शब्दों के मायने निकाले जाएं तो उनसे स्पष्ट है कि नीतीश कुमार पीएम पद का उम्मीदवार बनने की इच्छा रखते हैं और पार्टी ने उसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। खबर है कि नीतीश कुमार जल्द ही दिल्ली का दौरा करने वाले हैं। इस दौरान उनकी विपक्ष के कई नेताओं के साथ मुलाकात की योजना है। इससे उन्हें पता चल जाएगा कि कौन-कौन-सी पार्टी चाहती है कि वे आगे पीएम पद के उम्मीदवार हों। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता शरद यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि नीतीश कुमार विपक्ष की ओर से उम्मीदवार हो सकते हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की प्रबल इच्छा है कि नीतीश कुमार विपक्ष की ओर से पीएम पद के साझा उम्मीदवार हों और चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री भी बनें ताकि बिहार में तेजस्वी के मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हो सके। जानकार भी मानते हैं कि यदि लालू और नीतीश के वोटर एक साथ हो गए तो कम से कम बिहार में भाजपा के लिए दो-चार सीट लाना मुश्किल हो जाएगा। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में कोइरी,कुर्मी,वर्मा, लोध, शाक्य और मौर्य वोटों की संख्या अधिक है, उनकी भी मंशा है कि उनके समुदाय का कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री के पद पर सुशोभित हो सके। दूसरी ओर ओबीसी समुदाय की अन्य जातियों को भी उनसे परहेज नहीं है। मध्यप्रदेश और गुजरात के पटेल वगैरह जातियों का समर्थन भी सजाति होने के कारण नीतीश कुमार को मिल सकता है। मुसलमानों, सिखो और ईसाई समुदाय के लोगों में उनकी अच्छी छवि है। ऐसे में वे पीएम पद के सशक्त उम्मीदवार हो सकते हैं। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने ऐलान कर दिया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री पद के दावेदार होंगे। पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता मनीष सिसोदिया के खिलाफ सीबीआई जांच के बीच आप का कहना है किअगले लोकसभा चुनाव में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ही पीएम मोदी को टक्कर देंगे। पार्टी का कहना है कि मोदी वर्सेज हूं का जवाब मिल गया है और मोदी का विकल्प केजरीवाल ही बन सकते हैं। हालांकि, 2014 में पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से चुनाव लडऩे वाले केजरीवाल को ना सिर्फ उस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था, बल्कि सैकड़ों उम्मीदवारों को लड़ाने के बावजूद पार्टी को सिर्फ पंजाब में 4 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। वहीं, 2019 में पार्टी को महज एक सीट पर जीत मिली थी। फिलहाल केजरीवाल का हौसला बुलंद है और वह इस समय भाजपा के सबसे बड़े गढ़ गुजरात में पूरा जोर लगा रहे हैं। इसके अलावा हिमाचल में भी पार्टी पैर जमाने की कोशिश में है। इधर पिछले महीने 11 अगस्त को इंडिया टूडे के मूड ऑफ द नेशन सर्वे के मुताबिक पीएम मोदी की लोकप्रियता अब भी बरकरार है। सर्वे के मुताबिक, पीएम मोदी को 53 फीसदी लोग पीएम पद के लिए पहली पसंद मानते है, परंतु 2024 में राजनीतिक स्थिति कैसी होगी, इसका अंदाज अभी से लगाना आसान नहीं है।
पीएम पद के उम्मीदवार
