चीन अपने विस्तारवादी नीति के तहत पड़ोसी देशों की भूमि को कब्जाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते रहता है। अपने मकसद को पूरा करने के लिए वह छोटे-छोटे देशों को धमकाने तथा कर्जजाल में फंसाने के लिए साजिश रचता है। श्रीलंका, पाकिस्तान, नेपाल एवं बांग्लादेश जैसे देश ड्रैगन के कर्जजाल नीति का शिकार हो रहे हैं। भारत के साथ भी उसका पिछले दो वर्षों से सीमा पर तनाव चल रहा है। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारत और चीन की सेनाएं एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी हैं। चीन भारत पर दबाव बनाकर अपना मकसद पूरा करना चाहता था, लेकिन भारत जिस अंदाज में चीन को जवाब दे रहा है उससे ड्रैगन आश्चर्यचकित है। भारत अभी तक चीन की वन चाइना पॉलिसी पर खामोश था किंतु श्रीलंका की घटना ने भारत को कड़ा रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया। मालूम हो कि भारत के विरोध के बावजूद चीन का जासूसी जहाज युआन बांग-5 श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर एक सप्ताह तक रुका रहा। चीन इस जहाज के माध्यम से भारत के सामरिक ठिकानों की जासूसी की मंशा बनाए हुए था। इसके बाद चीन ने कश्मीर के मुद्दे पर भी पाकिस्तान के पक्ष में बयान देकर भारत को और भडक़ा दिया। इसके जवाब में भारत ने पहली बार ताइवान के मुद्दे पर कड़ा बयान दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन को ताइवान के जल-क्षेत्र में यथास्थिति बदलने की एकतरफा कार्रवाई से बचना चाहिए। भारत के इस बयान से चीन को मिर्ची जरूरी लगी है, लेकिन ताइवान ने भारत को इस समर्थन के लिए धन्यवाद दिया है। चीन जैसा देश शक्ति की भाषा समझता है। भारत ताइवान के साथ व्यापारिक संबंध को मजबूत बनाने के लिए लगातार पहल कर रहा है। ताइवान का प्रतिनिधिमंडल व्यापार को बढ़ाने के लिए भारत की यात्रा पर आया था। दोनों देशों के बीच बढ़ता संबंध चीन पर नकेल कसने के लिए  जरूरी है। अमरीका, आस्ट्रेलिया एवं अन्य पश्चिमी देश चीन की दादागिरी के खिलाफ भारत के साथ खड़े हैं। भारत कूटनीतिक प्रयास के साथ-साथ अपनी सामरिक तैयारी को भी मजबूत करता जा रहा है। चीन भारत, ताइवान सहित अन्य पड़ोसी देशों के साथ युद्धाभ्यास कर पड़ोसी देशों को डराने की कोशिश करता है। अब भारत भी उत्तराखंड सीमा के पास अमरीका का साथ बड़ा युद्धाभ्यास करने जा रहा है, जो चीन के काफी नजदीक है। क्वाड के माध्यम से भारत अमरीका, जापान तथा आस्ट्रेलिया के साथ मिलकर दक्षिण एवं पूर्वी चीन सागर में चीन को घेरने के लिए काम कर रहा है। ताइवान के पास भी अमरीका और जापान का युद्धाभ्यास यह दर्शाता है कि चीन को घेरने के लिए अब अमरीका भी सक्रिय हो गया है। आस्ट्रेलिया के उत्तरी-पूर्वी तट से लगभग 2000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सोलोमन द्वीप में चीन नौसैनिक अड्डा  बनाने के लिए पहल कर रहा है। इससे आस्ट्रेलिया की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। अमरीका इस क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए अपने दो बड़े युद्धपोतों को तैनात कर रखा है। चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए अमरीका ताइवान को सामरिक दृष्टि मजबूत कर रहा है। चीनी युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए अमरीका ताइवान को 1.1 अरब डॉलर की घातक मिसाइल देने जा रहा है। अमरीका चीन के आसपास स्थित अपने सामरिक अड्डे पर भी बी1 एवं बी2 जैसे खतरनाक लड़ाकू विमानों को तैनात कर यह दिखाने का प्रयास किया है कि अमरीका ताइवान के साथ मजबूती के साथ खड़ा है। फिलीपींस एवं वियतनाम जैसे देशों को ब्रह्मोस मिसाइल देने की प्रक्रिया शुरू कर भारत ने यह दिखा दिया है कि वह चीन के प्रति अपनी पुरानी नीति को बदलने के रास्ते पर निकल पड़ा है। अगर चीन ने कश्मीर एवं सीमावर्ती क्षेत्रों के बारे में अपनी नीति नहीं बदली तो भारत ताइवान के मुद्दे पर अमरीका के साथ खुलकर खड़ा होने से नहीं हिचकेगा।