ऑयल पुलिंग का मतलब होता है तेल से कुल्ला करना। जी हां और इससे आयुर्वेद में कवाला या गंदुशा के नाम से जाना जाता है। गंदुशा में अपने मुंह को पूरी तरह से तेल से भरना पड़ता है और थोड़े समय बाद इसे बाहर थूकना पड़ता है। जी दरअसल इसमें और कवलग्रह में बस इतना अंतर है कि कवलग्रह में मुंह को पूरी तरह तेल से भरा नहीं जाता है। यहां मुंह से तेल को थूकने से पहले मुंह में हिलने की जगह होती है। नियमित रूप से ऑयल पुलिंग करने से स्वास्थ्य को कई लाभ होते हैं। ऑयल पुलिंग के लिए जैतून या नारियल दोनों तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

ऑयल पुलिंग करने का तरीका : ऑयल पुलिंग करने के लिए आप नारियल के तेल, तिल के तेल, सूरजमुखी के तेल या जैतून के तेल में से किसी एक तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। जी दरअसल हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार ऑयल पुलिंग करने का सबसे अच्छा समय सुबह खाली पेट है। इसके लिए एक बड़े चम्मच तेल को अपने मुंह में डालकर इसे 15 से 20 मिनट के लिए मुंह के अंदर चारों तरफ घुमाएं और कुल्ला करें। हालांकि ध्यान रखें कि इस दौरान आपको तेल को बिल्कुल भी निगलना नहीं है। वहीं इसके बाद तेल को थूक कर सादे पानी या गर्म पानी से अच्छी तरह से कुल्ला कर लें। इसके बाद आप ब्रश कर लें।

कैविटी से बचाव : मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया दांतों में प्लाक का कारण बनते हैं, जिससे कैविटी यानी दातों में खोखलेपन की समस्या हो जाती है।  इसका इस्तेमाल करने से कैविटी की समस्या से छुटकारा मिल सकता है।

ऊर्जा में बढ़ोतरी : आयल पुलिंग का सबसे बड़ा लाभ है कि यह आपके शरीर की एनर्जी को बढ़ाता है।

मसूड़ों की सूजन दूर : तिल के तेल, सूरजमुखी के तेल और नारियल के तेल से होने वाले ऑयल पुलिंग के फायदे में मसूड़ों की सूजन को दूर करना भी शामिल है।

रोगप्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि : आयल पुलिंग से शरीर से परजीवी और विषाक्त पदार्थ साफ हो जाते हैं। इसके अलावा यह खून को शुद्ध करता है।

सांस की बदबू दूर : आयल पुलिंग सांस की बदबू से छुटकारा मिल सकता है।