मनोज जालान 

मंदिर के अस्तित्व की कहानी महाभारत के समय में हमें ले जाती है। ऐसा कहा जाता है कि नारायणी की इच्छा थी अभिमन्यु से विवाह करने की जिसे भगवान श्रीकृृष्ण ने आशीर्वाद देते हुए दोनों के अगले जन्म में पूरा किया। मंदिर की पौराणिक कथा उस समय हिसार का राजा जो अभिमन्यु के घोड़े को जीतना चाहता था, उसने अपने पुत्र को अभिमन्यु से युद्ध करने के लिए भेजा ताकि वह उस युद्ध में उस घोड़े को जीत कर ला सके। उस युद्ध में राजा के बेटे को अभिमन्यु ने मार डाला और विजय प्राप्त की। गुस्से में राजा ने नारायणी की आंखों के सामने अभिमन्यु की हत्या कर दी। नारायणी ने उस राजा से लड़ाई की और उसे मार डाला। इसके बाद उन्होंने राणी जी, घोड़े के रखवाले को आदेश दिया कि उनके पति के अंतिम संस्कार के साथ उनकी भी आत्मदाह की तैयारी की जाए। सती के प्रति वफादार होने के नाते राणाजी को आशीर्वाद प्राप्त हुआ कि पूजा में सती के नाम के साथ उनका भी नाम लिया जाएगा। इसलिए तब से उन्हें राणी सती कहा जाने लगा। 400 साल पुराना है राणी सती का झुंझुनू मंदिर : राणी सती दादी मन्दिर राजस्थान के झुंझुनू में स्थित है। राणी सती की पूजा के लिए समर्पित यह सबसे बड़ा मंदिर है। बाहर से देखने में ये मंदिर किसी राजमहल सा दिखाई देता है। मंदिर में शनिवार व रविवार को खास तौर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। राणी सती जी को समर्पित ये मंदिर 400 साल पुराना है। यह मंदिर सम्मान, ममता और स्त्री शक्ति की प्रतीक है। भक्त यहां विशेष प्रार्थना करने के साथ ही भाद्रपद माह की अमावस्या पर आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठान में भी हिल्सा लेते हैं। लगी है 16 देवियों की मूर्तियां :  राणी सती मंदिर परिसर में कई और मंदिर हैं, जो शिवजी, गणेशजी, माता सीता और रामजी के परम भक्त हनुमान को समर्पित हैं। मंदिर परिसर में षोडश माता का मंदिर है, जिसमें 16 देवियों की मूर्तियां लगी हैं। मंदिर सुबह 5 बजे से दोपहर एक बजे तक व शाम 3 बजे से रात्रि 10 बजे तक खुला रहता है। मंदिर के गर्भ गृह में निकर और बरमुडा पहने लोगों का प्रवेश वर्जित है। मंदिर का दफ्तर सुबह 9 बजे से शाम 8 बजे तक खुला रहता है। 


(मनोज विकास), गुवाहाटी