कांग्रेस के नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए पिछले वर्ष से ही मुहिम चल रही है। कांग्रेस हाईकमान से नाराज जी-23 के नेताओं ने पार्टी की हो रही लगातार हार पर विचार करने के लिए कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने पर जोर दिया था। अंत में पार्टी हाईकमान ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर यह फैसला किया कि वर्ष 2022 में 31 अगस्त से लेकर 20 सितंबर के बीच कांग्रेस के नए अध्यक्ष का चुनाव कर लिया जाएगा। विधानसभा चुनावों में तथा लोकसभा चुनाव में पार्टी की लगातार हो रही हार के बाद राहुल गांधी ने वर्ष 2019 में अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद से ही सोनिया गांधी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी हुई हैं। अब फिर से नए अध्यक्ष के लिए पहल शुरू हुई है। पार्टी का एक धड़ा राहुल गांधी को फिर से अध्यक्ष के रूप में देखना चाहता है। इस धड़े का मानना है कि उनके अध्यक्ष नहीं बनने से पार्टी में दरार आ सकती है। दूसरा धड़ा यह चाहता है कि इस बार गांधी-नेहरू परिवार से अलग कोई अध्यक्ष पद की कमान संभाले। अभी तक राहुल गांधी अध्यक्ष बनने से इनकार कर रहे हैं। गांधी परिवार प्रियंका गांधी वाड्रा को पूर्णकालिक अध्यक्ष का पद देने को तैयार नहीं है। अस्वस्थ होने के कारण सोनिया गांधी यह बड़ी जिम्मेवारी को आगे भी संभालने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसी खबर है कि सोनिया गांधी चाहती हैं कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अध्यक्ष पद की जिम्मेवारी संभालें। हालांकि अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। अगर गहलोत यह जिम्मेवारी संभालते हैं तो कांग्रेस हाईकमान को राजस्थान कांग्रेस में चल रही उठा-पटक को संभालने का मौका मिल जाएगा। पार्टी सचिन पायलट को राजस्थान की कमान सौंप कर युवा वर्ग को संतुष्ट कर सकती है। लेकिन गहलोत खेमे को यह चिंता है कि अगर वे मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं तो राजस्थान कांग्रेस पर उनकी पकड़ कमजोर हो जाएगी। गहलोत के अलावा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, हरियाणा कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष कुमारी शैलजा, कांग्रेस के महासचिव तथा राज्यसभा के सांसद मुकुल वासनिक के नाम भी अध्यक्ष पद की रेस में है। अगर खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष बनते हैं तो उससे कर्नाटक में कांग्रेस की स्थिति मजबूत होगी। मालूम हो कि अगले वर्ष कर्नाटक विधानसभा का चुनाव होने वाला है। इसी तरह अगर भूपेश बघेल अध्यक्ष बनते हैं तो छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के लिए चल रही लड़ाई पर विराम लग सकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंह देव वादे के अनुसार मुख्यमंत्री के पद पर आसीन होना चाहते हैं। यह तभी संभव है जब बघेल कुर्सी खाली करें। मुकुल वासनिक का महाराष्ट्र एवं राजस्थान में अच्छा प्रभाव है। वे राजस्थान से राज्यसभा के सांसद हैं। लगातार चुनाव हार रही कांग्रेस के लिए अध्यक्ष पद कांटों से भरा ताज है। नए अध्यक्ष को फिर से पार्टी को जीत की पटरी पर लाने की चुनौती होगी। कांग्रेस हाईकमान को यह चिंता है कि अगर गांधी परिवार से बाहर कोई व्यक्ति अध्यक्ष बनता है तो पार्टी  की एकता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में पार्टी के एक धड़े का मानना है कि सोनिया गांधी अध्यक्ष पद की कुर्सी पर बनी रहें। उनके नीचे दो या तीन कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति की जाए जिससे सोनिया गांधी पर कामकाज का दबाव कम रहे तथा गांधी-नेहरू परिवार का वर्चस्व भी कायम रहे।  हाल के दिनों में कांग्रेस के भीतर चल रही बगावत से पार्टी को भारी नुकसान पहुंचा है। पंजाब में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। जहां जहां कांग्रेस की हार हो रही है वहां आम आदमी पार्टी (आप) नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का विकल्प बनने की जोरदार कोशिश में है। पंजाब, मेघालय, त्रिपुरा सहित कुछ अन्य राज्यों में आप कांग्रेस की खाली जगहों को भरने के लिए प्रयासरत है। हाल ही में गुलाम नबी आजाद एवं आनंद शर्मा जैसे पुराने अनुभवी नेताओं ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह दर्शाता है कि कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऐसा लगता है कि अध्यक्ष पद के बारे में अंतिम फैसला सोनिया गांधी के विदेश से लौटने के बाद ही हो पाएगा।