गुवाहाटीः असम के सरकारी कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को लेकर सोमवार को प्रदर्शन किया और मांग नहीं मानी जाने की सूरत में प्रदर्शन तेज करने की चेतावनी दी। राज्य भर में ‘ऑल असम गवर्नमेंट एनपीएस इम्प्लॉइज एसोसिएशन (एएजीएनपीएसईए) के कर्मचारियों ने दिन में अपने-अपने कार्यस्थलों पर ‘करमा बिरत्री’ मनाया। एएजीएनपीएसईए के अध्यक्ष अच्युतानंदन हजारिका ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब असम सरकार को यह दिखाना होगा कि वह वास्तव में कर्मचारियों के पक्ष में है अथवा नहीं। अच्छी पेंशन एक कर्मचारी का हक है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय पेंशन योजना’ के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारी प्रति माह बेहद मामूली जैसे 500, 600, अथवा 1,000 रुपए पेंशन के तौर पर पाता है। जिसे मासिक पेंशन नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी, पुलिस कर्मी समाज के कल्याण के लिए समर्पित हैं और उन्होंने अपना सबसे अधिक उत्पादक और ऊर्जावान समय राज्य के लोगों के लिए ही बिताया। उन्होंने आगे कहा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और पंजाब सरकार इस संदर्भ में पहले ही सकारात्मक कदम उठा चुके हैं और अपने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन प्रणाली के अनुसार लाभ देने का फैसला किया है। हजारिका ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि मामले के समाधान के लिए असम भारत का 5वां राज्य और पहली भाजपा नेतृत्व वाली सरकार होनी चाहिए। यह भी एक तथ्य है कि हमारे पास राज्य में एक दूरदर्शी मुख्यमंत्री है जो इस मुद्दे से अच्छी तरह वाकिफ है और वे असम सरकार के कर्मचारियों के कल्याण के लिए कोई भी निर्णय लेने में सक्षम है।