नई दिल्ली: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सहकारी समितियों के जरिए 10 लाख करोड़ रुपए का कृृषि-ऋण मुहैया कराने के लिए देश भर में दो लाख से अधिक नई प्राथमिक कृृषि ऋण सहकारी समितियों (पैक्स) के गठन की जरूरत है। शाह ने यहां ग्रामीण सहकारी बैंकों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश में फिलहाल 95,000 से अधिक पैक्स समितियां मौजूद हैं लेकिन उनमें से करीब 63,000 समितियां ही सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पैक्स समितियां कृृषि क्षेत्र की कर्ज प्रणाली की आत्मा हैं लिहाजा उनका सशक्तीकरण और विस्तार जरूरी है। मंत्री ने कहा कि देश भर में तीन लाख पंचायतें मौजूद हैं लेकिन पैक्स समितियों की संख्या सिर्फ 95,000 ही है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में दो लाख से अधिक नई पैक्स समितियों के गठन की जरूरत है। शाह ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य सहकारी बैंकों (एससीबी) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) के वरिष्ठ अधिकारियों से एक पंचवर्षीय योजना बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों के जरिए कृृषि क्षेत्र को वित्त मुहैया कराने की दर घटी है। इस समय सक्रिय 63,000 पैक्स समितियों ने दो लाख करोड़ रुपए का कृृषि ऋण वितरित किया है। सहकारिता मंत्री ने कहा कि अगर पैक्स समितियों की संख्या तीन लाख तक पहुंच जाती है तो सहकारी समितियों के जरिए 10 लाख करोड़ रुपए तक का कृृषि ऋण वितरित कर पाना मुमकिन होगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने पैक्स समितियों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए इनके कंप्यूटरीकरण के प्रस्ताव को स्वीकृृति दी है। पांच साल के भीतर मौजूरा पैक्स समितियों के कंप्यूटरीकरण के लिए कुल 2,516 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। शाह ने पैक्स समितियों को अपने फलक का विस्तार करने और अधिक संख्या में किसानों को अपने साथ जोडऩे का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने पैक्स समितियों के मानक नियमों का एक मसौदा जारी कर राज्य सरकारों एवं अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन सुझावों के आधार पर जल्द ही नियमों को अंतिम रूप देगी। मानक नियमों के मसौदे में पैक्स समितियों को पेट्रोलियम उत्पादों का वितरक बनने और राशन की सरकारी दुकानों के संचालन का काम सौंपने का भी प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस मसौदे में 22 नए कार्यों से जुडऩे की मंजूरी देने की बात कही गई है।
कृृषि-ऋण मुहैया कराने के लिए दो लाख नई सहकारी समितियों का गठन जरूरी : शाह
