विमल जैन
श्रावण मास का लोकप्रिय महापर्व रक्षाबंधन प्रतिवर्ष श्रावण मास के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन हर्ष उमंग व उल्लास के साथ मनाने की परम्परा है। सुख-समृद्धि, सौभाग्य व दिर्घायु तथा अपने भाई-बहन के रिश्ते को अटूट व मधुर बनाने के लिए बहनें भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधती हैं। प्रख्यात ज्योतिषविद् श्री विमल जैन ने बताया कि इस बार यह पर्व 11 अगस्त, गुरुवार को मनाया जाएगा। श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त, गुरुवार को दिन में 10 बजकर 39 मिनट पर लग रही है जो कि अगले दिन 12 अगस्त, शुक्रवार को प्रातः 7 बजकर 06 मिनट तक रहेगी। इस बार सौभाग्य योग का अनूठा संयोग 11 अगस्त, गुरुवार को दिन में 3 बजकर 25 मिनट से 12 अगस्त, शुक्रवार को दिन में 11 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। पूर्णिमा तिथि के प्रारम्भ में दिन में 10 बजकर 39 मिनट से रात्रि 8 बजकर 53 मिनट तक भद्रा रहेगी, यह भद्रा पाताल लोक की है। रक्षा बन्धन का पर्व भद्रारहित पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। भद्रा समाप्त होने के पश्चात् रात्रि में प्रदोष काल तक रक्षा-बन्धन पर्व मनाया जाना श्रेष्ठ रहेगा। इस बार भद्रा समाप्त होने के बाद रात्रि में ही प्रदोष काल में रक्षा बन्धन किया जाना श्रेष्ठ है। 12 अगस्त, शुक्रवार को प्रातः 7 बजकर 06 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात् प्रतिपदा तिथि लग जाएगी। व्रत की पूर्णिमा 11 अगस्त, गुरुवार को रहेगी इस दिन श्रीसत्यनारायण भगवान का व्रत एवं कथा का आयोजन होगा। स्नान-दान की श्रावण पूर्णिमा 12 अगस्त, शुक्रवार को रहेगी, इसी दिन से श्रावण मास को यम-नियम-संयम समाप्त हो जाएंगे।
पूजा का विधान : अपने समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर नवपरिधान धारण करके धार्मिक विधि-विधान से अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा करनी चाहिए। इस दिन सप्तऋषियों की भी पूजा करने का विधान है। उनके आशीर्वाद से मंगल कल्याण होता है। भविष्यपुराण के अनुसार विधि-विधानपूर्वक रक्षासूत्र धारण करने पर व्यक्ति के समस्त रोग उससे दूर रहते हैं, उसे जीवन भर आरोग्य सुख मिलता है। रक्षासूत्र धारण करने पर जाने-अनजाने जो भी अशुभ कार्य हो जाते हैं, वे सभी का प्रभाव नष्ट हो जाता है। श्रावण पूर्णिमा के दिन बहनें अपनी परम्परा के अनुसार पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके भाइयों को टीका लगाकर, उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं। यदि राशियों के रंग के अनुसार भाई को राखी बाँधें तो उनके सौभाग्य में वृद्धि होगी। मान्यता के अनुसार सुनहरा, पीला और लाल रंग की राखी बांधने का रिवाज है। भाइयों की जन्मतिथि व राशि के अनुसार भी राखी का रंग रखना सौभाग्य का प्रतीक है।