नई दिल्ली: देश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री जुलाई में पिछले महीने के मुकाबले घटी है। मानूसन आने के साथ कुछ क्षेत्रों मे मांग कम होने के साथ आवाजाही भी बाधित हुई है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, देश में सबसे अधिक उपयोग वाले ईंधन डीजल की खपत जुलाई में 13.1 प्रतिशत बढक़र 64.4 लाख टन रही जो जून महीने में 73.9 लाख टन थी। आमतौर पर मानसून आने के साथ जुलाई-सितंबर के दौरान डीजल की मांग कम होती है। बारिश से आवाजाही पर प्रतिकूल असर पड़ता है और कृषि क्षेत्र में भी भी सिंचाई तथा परिवहन सेवाओं के लिए डीजल की मांग घट जाती है। आंकड़ों के अनुसार, हालांकि जुलाई महीने में डीजल की मांग सालाना आधार पर 17.1 प्रतिशत अधिक है। इसका कारण मजबूत आर्थिक वृद्धि के साथ कमजोर तुलनात्मक आधार भी है। पिछले साल कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से कुछ महीने कामकाज प्रभावित हुआ था। डीजल की खपत जुलाई, 2020 के 48.4 लाख टन के मुकाबले 32.4 प्रतिशत अधिक है। वहीं कोविड-पूर्व बिक्री 61.1 लाख टन की तुलना में पांच प्रतिशत ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोल की बिक्री जुलाई में घटकर 26.6 लाख टन रही जो इससे पिछले महीने जून में 28 लाख टन थी। हालांकि, जुलाई, 2021 के मुकाबले खपत 12.2 प्रतिशत ज्यादा है। जबकि 2020 के इसी महीने के मुकाबले 31.2 प्रतिशत अधिक है। कोविड-पूर्व स्तर, 2019 के जुलाई महीने के मुकाबले यह 16.3 प्रतिशत ज्यादा है। जून महीने में लोगों के भीषण गर्मी से बचने और बच्चों के स्कूलों में छुट्टियों के साथ ठंडे क्षेत्रों में जाने से पेट्रोल की मांग बढ़ी थी। आंकड़ों के अनुसार, विमान ईंधन (एटीएफ) की मांग इस साल जुलाई महीने में सालाना आधार पर 79 प्रतिशत बढक़र 5,33,600 टन पहुंच गई।