लंदन: ग्राहकों के ऑनलाइन शॉपिंग में खरीदे सामान को वापस करने के बढ़ते ट्रेंड को निराश करने के लिए रिटेलर मॉडर्न टेक्नोलॉजी को आजमा रहे हैं। रिटर्न की बढ़ती लागत ने उन्हें इस तरह के कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है। वे ग्राहकों की ऑनलाइन खरीदी में और ज्यादा टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन दे रहे हैं जिससे वे आइटम का बेहतर चुनाव कर सकें। जैसे बॉडी स्कैनिंग मशीन, अवतार, वीडियो, फोटो के जरिए आइटम की बेहतर जानकारी देना। आइटम ऑनलाइन खरीदे गए सामान को लौटाने का ट्रेंड वैसे तो सभी तरह के आइटम्स में है लेकिन कपड़ों में यह 50 फीसदी तक है। कोविड काल में आइटम ऑनलाइन शॉपिंग के साथ ही वापसी का ट्रेंड बढ़ा है। जिगजैग ग्लोबल के रिटन्र्स स्पेशलिस्ट अल गैरी का कहना है कि अब 40 फीसदी से ज्यादा शॉपर्स आइटम अर्डर देते समय कम से कम एक आइटम वापस करने की सोच रखते हैं जो कि कोविड के पहले 30 फीसदी था। उनका कहना है कि लोग लॉकडाउन में आइटम ऑनलाइन शॉपिंग को लेकर आइटम और सहज हुए हैं। ग्लोबल डाटा के एनालिस्ट के मुताबिक 2020 में ब्रिटेन में 59,618.51 करोड़ रुपए कीमत के प्रोडक्ट्स ग्राहकों ने वापस कर दिए। 2025 तक इसमें 9 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है। कोविड लॉकडाउन खत्म होने के बाद खासकर परिधानों में नए ट्रेंड आइटम आने के बाद ग्राहकों ने एक किस्म के दो प्रोडक्ट आइटम ऑर्डर करने आइटम और आइटम अजमाने के बाद कोई एक वापस करना शुरू कर दिया। ग्लोबल डाटा के पैट्रिक आइटम ओ ब्राएन का कहना है कि दुनिया में महंगाई बढऩे के कारण ग्राहक अपनी खरीद को लेकर आइटम और ज्यादा चूजी हो गए हैं। रिटर्न सामान में से 50 से 80 फीसदी तक ही तुरंत बेचने लायक होता है। रिटर्न किए गए 5 फीसदी ड्रेस दोबारा बेचे जाने की हालत में नहीं होते। बाकी कोरी-प्रोसेस के लिए भेजा जाता है आइटम और वहां से चेरिटी आइटम और थोक आइटम ऑनलाइन विक्रेता या शोरूम से बेचने के लिए भेजा जाता है। रिटर्न होने वाला बिजली का करीब 15 फीसदी सामान बेकार हो जाता है जिसे डिस्पोज करना पड़ता है। ब्राएन का कहना है कि व्यवहार में बदलाव जरूरी है क्योंकि रिटर्न से बहुत कचरा पैदा हो रहा है जो पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है।