नई दिल्ली: कई दशकों से सोने के एवज में कर्ज देने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की हिस्सेदारी अब घट रही है। इसके उलट बैंक इस क्षेत्र में तेजी से अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं। 2019-20 से 2021-22 में जहां मुथूट और मणापुरम की कर्ज वृद्धि में भारी गिरावट आई, वहीं, इसी अवधि के दौरान एचडीएफसी और केनरा बैंकों के कर्ज में भारी तेजी आई। केनरा बैंक में गोल्ड लोन के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) भावेंद्र कुमार ने कहा कि बैंकों का कर्ज इसलिए बढ़ रहा, क्योंकि उनकी ब्याज दरें एनबीएफसी की तुलना में कम है। बैंक 7.4 फीसदी की दर से जबकि एनबीएफसी 12 से 24 फीसदी के बीच में दे रहे हैं। बड़ी एनबीएफसी के कर्ज की वृद्धि में गिरावट आ रही है। वित्तवर्ष 2019-20 में मुथूट का असेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 40,800 करोड़ था। 2020-21 में 27 फीसदी बढक़र यह 51,900 करोड़ था। 2021-22 में केवल 11 फीसदी बढक़र 57,500 करोड़ रहा। मणापुरम का कारोबार 2019-20 में 31 फीसदी बढक़र 17,000 करोड़, 2020-21 में 12 फीसदी बढक़र 19,100 और 2021-22 में केवल चार फीसदी बढक़र 19,900 करोड़ रुपए रहा। एचडीएफसी बैंक के गोल्ड लोन का कारोबार मार्च, 2022 तक 8,800 करोड़ था। 2021 मार्च में यह 6,200 करोड़ रुपए था। इसमें 40 फीसदी तेजी आई है। बैंक अगले एक साल में सभी शाखाओं में गोल्ड लोन का अलग से प्रकोष्ठ बनाएगा। केनरा बैंक का गोल्ड लोन 3 साल में दोगुना होकर 31 मार्च, 2020 तक 56,788 करोड़ रुपए था। इस साल जनवरी से जून तक 26 फीसदी की वृद्धि रही, उसके पहले के साल में 18 फीसदी की वृद्धि रही।
बैंक खत्म कर रहे एनबीएफसी का एकाधिकार कम ब्याज दर पर दे रहे गोल्ड लोन
