पर्यावरण की सुरक्षा से ही मानव जीवन की रक्षा संभव है। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जंगल व पहाड़ों का होना बहुत जरूरी है। प्रतिदिन वृक्षों की अवैध तरीके से अंधाधुंध कटाई होने से जंगल सिमटता जा रहा है। पर्यावरण असुरक्षित होने से इसका बुरा असर मानसून पर भी पड़ता है। मानसून पर इसका असर पडऩे से वर्षा भी कम होने लगी है। वर्षा कम होने से हमारी कृृषि उपज पर बहुत असर पड़ता है। जिससे हमारी उपज प्रभावित होती है। आज असमय वर्षा होने से कृृषि कार्य काफी प्रभावित हो रही है। पर्यावरण को सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य को लेकर पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। पर्यावरण दिवस मनाकर लोग पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के प्रति संकल्प दुहराते हैं। पर्यावरण को सुरक्षित बनाए रखने के लिए जंगलों की सुरक्षा पर तथा पौधा रोपण पर विशेष कार्य किया जा रहा है। वनों की रक्षा तथा उसके विकास के लिए ग्रामीण वन समिति बनाकर उसकी देख रेख की जाती है। जंगल की सुरक्षा, संरक्षण तथा पौधा रोपण पर विशेष कार्य किया जाता है। इसके अलावे जंगल की अवैध कटाई पर रोक लगाने का भी कार्य किया जाता है। वन समिति द्वारा हरियाली मिशन के तहत किसान पौधशाला योजना का संचालन किया जा रहा है।  पेड़ों की अवैध कटाई नहीं करने, घर के काम में उपयोग के लिए सूखी लकडिय़ां ही काटने, हरे पेड़ों को नहीं काटने के लिए लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाने की अति आवश्यकता है जिससे हम वनों से पूरा लाभ उठा सकें। जंगल के आसपास रहने वाले शहरी लोग जंगल का मनोरम छंटा देखने के लिए और जहां पिकनिक मनाने वहां जाते हैंं वहीं जंगलों से हमें कई प्रकार की जड़ी-बूटियां भी मिलती हैं। इन जड़ी-बूटियों से हम कई प्रकार के असाध्य रोगों का इलाज करके अपने को स्वस्थ बनाते हैं। जंगलों की धड़ाधड़ कटाई से हमारी दुर्लभ जड़ी-बूटियां नष्ट होती जा रही हैं। जिससे हमें आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अगर हमें जंगलों से भरपूर जड़ी-बूटियां चाहिए तो सबसे पहले समाज को पेड़-पौधों की अच्छी तरह से देखभाल करना होगा ताकि हमारे जंगल समृद्ध हो सकें और हम उनसे भरपूर फायदा उठा सकें । इस तरह अगर हमें मानव जीवन को खुशहाल बनाना है तो जंगलों की सुरक्षा नितांत जरूरी है। हमें पूरी ईमानदारी और लगन से जंगलों की देखभाल में जुट जाना चाहिए तभी हमारा मानव समाज खुशहाल जीवन जी सकता है।